स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश के किसानों की पंचायत जगाधरी अनाज मंडी में प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी की अध्यक्षता में हुई। पंचायत के बाद किसान मुख्यमंत्री के नाम स्पीकर कंवरपाल गुर्जर को ज्ञापन देने के लिए उनके घर पर पहुंचे। यहां गुर्जर के न मिलने पर किसान भड़क गए। किसानों ने यहां पर सरकार का पुतला फूंका और ज्ञापन को भी आग के हवाले कर दिया।
भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले प्रदेश भर के किसान जगाधरी अनाज मंडी में पंचायत के रूप में एकत्रित हुए। यूनियन प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी सहित विभिन्न यूनियन नेताओं ने यहां सरकार की नीतियों की आलोचना की। पंचायत में 15 अगस्त को गढ़ी सांपला रोहतक में आयोजित होने वाले किसान आक्रोश दिवस को लेकर रणनीति बनाई गई।
पंचायत के बाद सभी किसान अपने वाहनों में सवार होकर स्पीकर आवास के नजदीक रेलवे रोड पर पहुंचे। किसान जब स्पीकर आवास की तरफ जाने लगे तो पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक लिया। जब किसानों ने स्पीकर को ज्ञापन देने की बात कहीं तो उन्हें बताया गया कि गुर्जर चंडीगढ़ गए हैं। इस पर किसानों को गुस्सा फूट गया। किसानों ने यहां सरकार का पुतला फूंका।
ज्ञापन को भी आग के हवाले कर दिया। प्रदर्शन में प्रदेश संयोजक बाबूराम गुंदयाना, संगठन सचिव हरपाल सिंह, जिला प्रधान संजू गुंदयाना, कृष्ण पाल, संदीप, संदीप टोपरा, गुरमुख सिंह, सतपाल, केसर सिंह, रामसिंह, धर्मपाल, कशमीरी लाल, बिंदर, राजेश, राजकुमार शामिल हुए।
नेता से अच्छा अधिकारी
गुरनाम चढूनी ने कहा कि उन्होंने कई दिन पहले ही स्पीकर कंवरपाल गुर्जर को पत्र लिखकर बताया था कि 27 जुलाई को वे उन्हें ज्ञापन सौंपेंगे लेकिन उन्होंने किसानों की नहीं सुनी। उन्होंने कहा कि सरकार के नेताओं से अच्छे तो यहां के प्रशासनिक अधिकारी हैं। जो कम से कम किसानों से मुलाकात तो कर लेते हैं।
गन्ने के भुगतान पर किया जा रहा गुमराह
भाकियू के जिला प्रधान संजू गुंदयाना ने बताया कि यमुनानगर शुगर मिल द्वारा बकाया पेमेंट का भुगतान नहीं किया गया है। मिल सरकार को और सरकार मिल को जिम्मेदार ठहराकर किसानों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि किसानों की बकाया गन्ना पेमेंट का जल्द भुगतान किया जाए।
बाढ़ में बहे ट्यूबवेल का बिल क्यों
पंचायत में किसानों ने कहा कि चार साल पहले यमुना नदी में बाढ़ आने के कारण किसानों की जमीनें, ट्यूबवेल व बिजली के पोल, तार, ट्रांसफार्मर सभी बह गए थे और आज भी उन किसानों के पास ट्यूबवेल के बिल लगातार आ रहे हैं, लेकिन कहीं पर न कोई पोल और न ही कोई ट्यूूबवेल है। किसानों ने मांग की कि बाढ़ प्रभावित किसानों की जमीन और ट्यूबवेल का मुआवजा दिया जाए और उनके बिजली के बिल भी माफ किए जाएं।
वादे पूरा करने से मुकर रही सरकार
चढूनी ने कहा कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में और 27 फरवरी, 2014 को जींद किसान पंचायत में भाजपा नेताओं ने स्वामीनाथ रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था। अब भाजपा सत्ता में है। वर्तमान में कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने इसी मांग पर आंदोलन भी किए थे, लेकिन अब वे यू टर्न लेते हुए इसे लागू नहीं कर रहे हैं।
ये हैं मुख्य मांगें
स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू की जाए।
भूमि अधिग्रहण की त्रुटियों को दूर करके जमीन के भाव वर्तमान बाजार कीमत से चार गुना दिया जाएं।
लावारिस पशुओं द्वारा खेतों में नुकसान रोकने का प्रबंध किया जाए।
फसल लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा मिले और न्यूनतम मूल्य पूरे देश में प्रभावी ढंग से लागू होना चाहिए।
किसानों की वास्तविक आय सिविल सेवकों के तुलनीय होनी चाहिए।
किसानों की न्यूनतम आय सुनिश्चित की जाए।
फसलों का बीमा हो और बिजाई से बाजार जोखिमों तक को कवर करना चाहिए।
नकली व घटिया स्तर के कीटनाशकों व उर्वरकों पर रोग लगाई जाए।