इंडस्ट्री एरिया स्थित बिमल एल्यूमीनियम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में एलपीजी गैस लीक होने के बाद लगी आग में झुलसे जीएम एसएस पुंडीर (56) व एसी मैकेनिक प्रताप सिंह (74) की पीजीआई में उपचार के दौरान मौत हो गई। दोनों लगभग 65 प्रतिशत झुलस चुके थे। कंपनी मालिक रजनीश खरबंदा समेत आग लगने से झुलसे 11 कर्मचारी अभी भी अस्पताल में उपचाराधीन है। पुलिस ने दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के हवाले कर दिया। पुलिस ने मामले में आरोपी फैक्टरी मालिकों पर दर्ज केस में गैर इरादतन हत्या की धारा भी जोड़ दी है।
सोमवार की सुबह करीब साढ़े 11 बजे इंडस्ट्रीयल एरिया स्थित एल्यूमीनियम मिल्क कैन बनाने वाली विमल एल्यूमीनियम प्राइवेट लिमिटेड फैक्टरी में आग लग गई थी। फैक्ट्री में लगे 400 किलोग्राम एलपीजी गैस सिलिंडर में अचानक लीकेज से आग फफक उठी। इस फैक्ट्री में एल्यूमीनियम की स्क्रैप गलाकर दूध के ड्रम, अन्य बड़े बर्तन व एल्यूमीनियम प्रोडक्ट बनाए जाते थे। एक सिलिंडर में गैस लीक होने से आग लगी, घटनास्थल पर 10 गैस सिलिंडर थे। गनीमत रही कि समय पर फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पा लिया। हादसे में मालिक रजनीश खरबंदा सहित 13 लोग झुलस गए थे। जिनमें से 11 का इलाज अभी भी चल रहा है। गंभीर रूप से झुलसे नौ लोगों को पीजीआई रेफर किया गया था। इनमें से 4 लोग 55 प्रतिशत तक झुलस गए थे, वहीं चार लोग 70 प्रतिशत के लगभग झुलस गए थे।
आग लगने से झुलसे श्रमिकों में इनका चल रहा उपचार
सिलिंडर की लीकेज के बाद लगी आग से जीएम एसएस पुंडीर, प्रताप सिंह, फैक्टरी मालिक रजनीश खरबंदा, वर्कर कमल, हर्षित, मोहन, संदीप, अनिल, सुमेर, सचिन, सत्यवीर, विकास, विनय झुलसे थे। इनमें से जीएम एसएस पुंडीर, प्रताप सिंह की मौत हो गई। जबकि अन्य का उपचार चल रहा है। इनमें कमल, हर्षित, मोहन, सत्यवीर, सुमेर, सोमपाल, सचिन और रजनीश खरबंदा का इलाज चंडीगढ़ पीजीआई में चल रहा है। बाकी अन्य का शहर के प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है।
ऐसे लगी थी फैक्टरी में आग
बतां दे कि फैक्ट्री में एल्यूमीनियम स्क्रेब को पिघलाकर मिल्क कैन बनाई जाती है। इस स्क्रेब को रोटरी भट्ठी में पिघलाया जाता है और यह भट्ठी एलपीजी गैस सिलेंडरों से चलती है। इसलिए वहां 400 किलोग्राम के गैस सिलेंडर लगाए गए हैं। किंतु आज सुबह से ही भट्ठी में कुछ दिक्कत चल रही थी। जिससे बार-बार सिलेंडर लीकेज हो रहा था। हालांकि इस लीकेज को रोकने के लिए ऊपर से पानी की बौछार (शॉवर) चलाया हुआ था। ताकि सिलिंडर ठंडा रहे। लेकिन सोमवार सुबह करीब सवा 11 बजे अचानक से सिलेंडर लीकेज होकर तेजी फफक गया। जिससे वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए और बुरी तरह से झुलस गए। घटना की सूचना मिलते ही आसपास की फैक्ट्रियों में हड़कंप मच गया। फैक्ट्री में भगदड़ मच गई।
वर्जन घटना के दिन ही फैक्टरी मालिकों पर अलग अलग धाराओं में मामला दर्ज कर लिया था। अब दो लोगों की मौत हो गई है, इसलिए इस मामले में धारा-304 यानी गैर इरादतन हत्या जोड़ दी गई है। मामले की जांच जा रही है।
- कंवलजीत सिंह, एसएचओ, शहर यमुनानगर।