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Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं को बताया गुरु और शिष्य का संबंध

Mon, 27 Jul 2026 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में सत्संग सुनने पहुंचे श्रद्धालु। आयोजक
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी वंशिका भारती ने श्रद्धालुओं को गुरु और शिष्य का संबंध बताया। उन्होंने कहा कि गुरु की आज्ञा शिष्य के जीवन को परम लक्ष्य की ओर अग्रसर करने वाली दिव्य शक्ति है।
उन्होंने कहा कि संसार में हर व्यक्ति अपनी बुद्धि, इच्छाओं और मन की प्रवृत्तियों के अनुसार कार्य करता है, किंतु मनुष्य का मन चंचल, सीमित और अनेक प्रकार के विकारों से प्रभावित होता है। ऐसे में यदि साधक केवल अपने मन का अनुसरण करता है, तो वह अनेक बार भ्रमित हो जाता है। इसके विपरीत सद्गुरु त्रिकालदर्शी होते हैं। वे शिष्य के वर्तमान ही नहीं, उसके भविष्य और आध्यात्मिक कल्याण को दृष्टिगत रखते हुए आज्ञा प्रदान करते हैं।
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साध्वी ने कहा कि शास्त्रों में भी गुरु आज्ञा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। गुरु आज्ञा का पालन केवल बड़े कार्यों तक सीमित नहीं होता अपितु जीवन के प्रत्येक छोटे-बड़े कार्य में अनुशासन, विनम्रता, सेवा, साधना, सत्संग और सदाचार को अपनाना भी गुरु आज्ञा का ही स्वरूप है। जब शिष्य बिना तर्क-वितर्क, बिना अहंकार और बिना स्वार्थ के गुरु की वाणी को अपने जीवन में उतारता है, तभी उसके भीतर श्रद्धा, धैर्य, विवेक और आत्मबल का विकास होता है।
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उन्होंने बताया कि अनेक बार गुरु की आज्ञा हमारी इच्छाओं के विपरीत प्रतीत होती है, किंतु वही आज्ञा हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करती है। जैसे स्वर्ण अग्नि में तपकर कुंदन बनता है, वैसे ही शिष्य गुरु आज्ञा के पालन से अपने दोषों, अहंकार और कमजोरियों को त्यागकर दिव्य गुणों से संपन्न होता है। गुरु कभी भी शिष्य को कष्ट देने के लिए नहीं अपितु उसके जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए मार्गदर्शन देते हैं।
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