साढौरा। पांच दशक पहले पेयजल व सिंचाई के साधनों की कमी के कारण अधिकतर कस्बावासी तालाबों पर ही निर्भर थे। वर्तमान में अवैध कब्जों व गंदगी के कारण तालाबों का दायरा सिमटने के साथ-साथ कई तालाबों का तो नामोनिशान ही नहीं रहा है।
पांच दशक पहले तक कस्बे में तोरा वाला, मनोकामना, गगड़वाला, उधोवाला व रोजे वाला आदि सहित धार्मिक व पौराणिक महत्व के दो दर्जन से अधिक तालाब थे। इनके अलावा व्यक्तिगत नामों से प्रसिद्ध मोरन वाला, केंदू वाला, आकला वाला, राज कटोरा वाला व शेख मीर वाला तालाब भी मौजूद थे लेकिन अवैध कब्जों व गंदगी के कारण अब इनमें से अधिकतर का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है। जो बचे हैं उनका भी दायरा अवैध कब्जों व गंदगी के कारण सिमटता ही जा रहा है।
जल संचयन के अत्यंत महत्वपूर्ण इन तालाबों की हालत को सुधारने के लिए कोई प्रयास न किया जाना बहुत चिंताजनक है। नगरपालिका ने दो तालाबों तोरा वाला व गगड़वाला के जीर्णोद्धार व सुंदरीकरण की योजना बनाई तो है लेकिन यह भी अधर में लटकी हुई है।
मोहल्ला मघान के 107 वर्षीय सेवा सिंह ने बताया कि कस्बे के प्रत्येक मोहल्ले में मौजूद इन तालाबों का पानी पशुओं को पानी पिलाने व नहलाने के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। इसके अलावा बरसात की कमी होने पर तालाबों से ही खेतों की सिंचाई की जाती थी। पहले लोग तालाबों के पानी को साफ बनाए रखने के लिए इनके किनारों पर गंदगी फेंकने व शौच करने से परहेज करते थे। जिसके कारण तालाबों का पानी इतना स्वच्छ होता था कि पेयजल के तौर पर भी इस्तेमाल होता था लेकिन वर्तमान में गंदगी के कारण तालाबों का दूषित पानी किसी भी तरह से इस्तेमाल नहीं हो पाता है।
89 वर्षीय प्रकाशो देवी ने बताया कि कुछ तालाबों के तट पर पक्के घाट बने होते थे, जिन्हें नहाने के अलावा कपड़े धोने आदि के लिए इस्तेमाल किया जाता था। धार्मिक महत्व के तालाबों पर तो पूजा व अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते रहे हैं। तालाबों से मिट्टी निकालकर मकानों की दीवारों व छत्तों पर लिपाई के लिए गारा तैयार किया जाता था। इस मिट्टी में इतनी ताकत होती थी कि इससे तैयार कच्ची ईंटें आज के भठ्ठों में पकाई ईंटों से भी कहीं अधिक मजबूत होती थी लेकिन अब तालाब ही नहीं रहे तो यह सब बातें कहां से होंगी।
समाजसेवी अमित सेतिया ने तालाबों की इस हालत पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि इंसान के लालच के कारण तालाबों जैसे जीवन के आधार व प्राचीन धरोहर का भी वजूद खत्म होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि तालाबों के संरक्षण तथा इन्हें स्वच्छ व सुंदर बनाए रखने के लिए प्रशासन ही नहीं सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं को भी प्रयास करने होंगे।
नगरपालिका की चेयरपर्सन शालिनी शर्मा ने बताया कि तालाबों के जीर्णोद्धार तथा सुंदरीकरण के लिए नगरपालिका संजीदगी से प्रयास कर रही है। तोरांवाला तालाब के योजना के टेंडर हो चुके हैं, जल्दी ही वर्क आर्डर जारी हो जाएगा। इसी तरह गगड़वाला की योजना भी अंतिम चरण में है। तालाबों से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए मनोकामना तालाब की निशानदेही करवाने के बाद अवैध कब्जे हटाने के लिए नोटिस दिए जा चुके हैं। बाकी तालाबों की भी जल्दी ही निशानदेही करवाई जाएगी।