संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। राजकीय विद्यालयों में अब विद्यार्थियों को केवल किताबी शिक्षा के साथ रोजगार उन्नमुखी कोर्स भी करवाए जाएंगे। ये कम अवधि वाले ऐसे कोर्स होंगे, जिन्हें करने के बाद विद्यार्थी नौकरी करने के साथ स्वरोजगार भी शुरू कर सकेंगे। इसके लिए शिक्षा के ढांचे में व्यवस्थागत बदलाव किया जाएगा, जिसमें विद्यार्थियों का चौमुखी विकास होगा। स्कूल से निकलने के बाद विद्यार्थी आत्मनिर्भर होंगे। ये विचार शिक्षामंत्री महीपाल ढांडा ने भाजपा कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि सरकार गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। इसके लिए शिक्षा क्षेत्र में नए प्रयोग भी किए जा रहे हैं। उनका लक्ष्य स्कूल स्तर पर ही विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना है। स्कूल की शिक्षा पूरी करने के बाद विद्यार्थी नौकरी नहीं ढूंढेंगे बल्कि स्वरोजगार से दूसरों को काम देंगे। इसके लिए विद्यालय स्तर पर ही विद्यार्थियों को इतना दक्ष बना दिया जाएगा। इसके लिए विभिन्न तरह की योजनाएं विद्यालयों में चलाई जा रही हैं।
शिक्षामंत्री आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भाजपा के कार्यक्रम में आए थे। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनने के लिए शिक्षा जरूरी है। राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को बेहतरीन शिक्षा व सुविधा मिले। इसके लिए व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत के लिए नई शिक्षा नीति लाई जाएगी। इसके अलावा विद्यालयों की मूल कमियां दूर करने के लिए काम किया जा रहा है। जल्द ही लोगों को व्यवस्था में सुधार नजर आएगा।
उन्होंने सरकार की ई-अधिगम योजना को शिक्षा क्षेत्र में क्रांति बताया। शिक्षामंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौर में सभी को ऑनलाइन शिक्षा का महत्व पता चला। इसके चलते राजकीय विद्यालयों में ई-अधिगम योजना शुरू की गई। योजना के तहत विद्यार्थियों को टैबलेट दिए गए हैं। सरकार इसके विस्तार पर विचार कर रही है, लेकिन उससे पहले इसके दुरुपयोग पर अंकुश लगाने का काम किया जाएगा। इसके लिए समीक्षा की जा रही है। टैबलेट योजना की खामियों को दूर किया जाएगा और विद्यार्थी इसका किसी तरह से दुरुपयोग न कर सकें, ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी। टैबलेट का विद्यार्थियों को उचित लाभ मिले, इसके लिए विभाग विभिन्न स्तर पर मंथन कर रहा है।