संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने के बावजूद पेट्रोल पंपों पर विवाद की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। हालात यह हैं कि पंप कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच रोजाना बहस हो रही है, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। इसकी मुख्य वजह प्रशासन द्वारा ड्रम में 100 लीटर से अधिक डीजल देने पर लगाई गई सीमा है।
प्रशासन ने कालाबाजारी पर रोक लगाने के उद्देश्य से यह निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी व्यक्ति को ड्रम या कैन में 100 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दिया जाएगा। हालांकि वाहनों में पेट्रोल या डीजल भरवाने पर कोई सीमा लागू नहीं है। इसके बावजूद कई लोग बड़ी मात्रा में डीजल लेने की जिद कर रहे हैं, जिससे पंपों पर विवाद की स्थिति बन रही है।
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग ड्रम लेकर पहुंच रहे हैं और उन्हें पूरा भरने की मांग करते हैं। जब कर्मचारियों द्वारा प्रशासनिक आदेशों का हवाला देकर मना किया जाता है, तो ग्राहक बहस करने लगते हैं। कई बार स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है, जिससे कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हरियाणा पेट्रोलियम वेलफेयर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष विशाल शर्मा ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में इस तरह के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। कर्मचारी केवल नियमों का पालन कर रहे हैं, लेकिन लोग इसे समझने को तैयार नहीं हैं। उधर, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी की चर्चाओं ने भी मांग को बढ़ा दिया है। जिले में ईंधन की खपत में करीब 30 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। लोग भविष्य में कीमतें बढ़ने की आशंका के चलते अधिक मात्रा में ईंधन संग्रह करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे पंपों पर दबाव बढ़ रहा है।
जिले में पेट्रोल, डीजल की किसी प्रकार की कमी नहीं है और तेल कंपनियों से नियमित आपूर्ति जारी है। आमजन अनावश्यक रूप से ईंधन का भंडारण न करें और नियमों का पालन करें। नियमों को लेकर आम लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा रही है। पेट्रोल, डीजल के अलावा गैस सिलिंडरों की कालाबाजारी करने वालों पर भी नजर रखी जा रही है। नियमित रूप से छापे मारे जा रहे हैं। - प्रीति, डीसी यमुनानगर।