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बिजली के तार शिफ्ट न होने से अटका पैदल पुल का काम

Sat, 21 Jun 2014 12:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
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यमुनानगर। जगाधरी रेलवे स्टेशन पर बने पैदल पुल को बढ़ाकर पुराना हमीदा तक ले जाने का कार्य एक बार फिर अधर में लटक गया है। इसका प्रमुख्ा कारण्ा पुराना हमीदा की तरफ एनएच-73 सहारनपुर-कुरुक्षेत्र मार्ग पर पुल से लगते तार की शिफ्टिंग को लेकर बिजली निगम और रेलवे विभाग के बीच पेंच फंसना है।
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इस मामले के संबंध में रेलवे की ओर से तीन माह पहले स्थानीय बिजली निगम अधिकारियों के साथ मीटिंग हुई थी। इसमें तय हुआ कि रेलवे को बिजली के तारों को थोड़ी दूरी पर शिफ्ट करने के लिए बिजली निगम को दो लाख पंद्रह हजार रुपये जमा कराने होंगे अन्यथा रेलवे स्वयं ठेकेदार से यह कार्य करवाए।

रेलवे ने दोनों ही विकल्पों पर तीन माह की अवधि में गौर नहीं किया। अब जब पुल का काम अंतिम पड़ाव पर है, तो शुक्रवार को रेलवे के ब्रिज डिपार्टमेंट शकूरबस्ती, नई दिल्ली के सीनियर सेक्शन इंजीनियर राजू नालेवाल ने स्थानीय बिजली विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर दो घंटे का ब्लॉक मांगा गया। इस पत्र के जवाब में संबंधित क्षेत्र के एसडीओ सुभाषचंद्र ने उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर रेलवे को पत्र भेज दिया। इसमें बिजली निगम ने पुन: तीन माह पूर्व हुई बैठक के दोनों ही विकल्प रेलवे के सामने रख दिए।
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गौरतलब है कि पुराना हमीदा और इसके साथ लगते दर्जनों गांवों और कॉलोनियों के हजारों लोगों को कई किलोमीटर घूमकर जगाधरी रेलवे स्टेशन और यमुनानगर शहर आना पड़ता है या फिर मजबूरन उन्हें रेलवे यार्ड से रेल लाइनें पार करनी पड़ती हैं। दोनों ही सूरत में लोगों को परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है।

 जिसको लेकर कई वर्षों से दैनिक रेल यात्री संघ और अन्य कई संगठनों की ओर से जगाधरी रेलवे स्टेशन से पुराना हमीदा तक पैदल पुल बनाए जाने की मांग की जा रही थी। इसके बाद रेलवे की ओर से जगाधरी रेलवे स्टेशन के माल गोदाम की ओर से स्टेशन के प्लेटफॉम तक पैदल पुल बनाया गया। जिसका 15 अप्रैल 2013 को पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्य सभा सांसद कुमारी सैलजा और राज्य सभा सांसद ईश्वर सिंह ने उद्घाटन किया। उस दौरान कुमारी सैलजा ने आश्वासन दिया कि सालभर के भीतर इस पुल को बढ़ाकर पुराना हमीदा तक पहुंचा दिया जाएगा। लेकिन एक वर्ष से दो माह अधिक हो चुके हैं, अब भी पुल का काम पूरा नहीं हो पाया है।

लाइन क्रॉसिंग से बढ़ते हादसों के चलते उठी थी मांग
पुराना हमीदा क्षेत्र और इसके साथ लगती दर्जनों कॉलोनियों व गांवों के लोगों को रादौर रोड स्थित रेलवे फाटक या फिर विश्वकर्मा चौक के बाइपास के रास्ते से घूमकर जगाधरी रेलवे स्टेशन या फिर शहर आना पड़ता है। वाहन चालकों की इन रास्तों से आना मजबूरी है, किंतु जो लोग पैदल रोजाना स्टेशन या शहर आते-जाते हैं, उनके लिए रेलवे यार्ड की लाइनों को क्रॉस करना ही शॉर्टकट बन गया है। लेकिन ये शॉर्टकर्ट आए दिन जानलेवा साबित हो रहा है, क्योंकि लाइनें क्रॉस करते हुए ट्रेन की चपेट में आकर होने वाली लोगों की मौत का आंकड़ा निरंतर बढ़ रहा है।

नहीं चल पाई क्रेन, रेलवे को 40 हजार का नुकसान  
रेलवे के ब्रिज डिपार्टमेंट शकूरबस्ती, नई दिल्ली के सीनियर सेक्शन इंजीनियर राजू नालेवाल ने बताया कि पुल का पूरा ढांचा तैयार होने के बाद उसे खड़ा करने के लिए तीन दिन पहले हाई-फेसिलिटेट क्रेन मंगवाई गई थी। जिसकी मदद से रेलवे यार्ड में दो चार कॉलम और दो दो कॉलम स्पोर्ट पर पुल के ढांचे को खड़े का दिया गया, लेकिन शुक्रवार को पुराना हमीदा की तरफ नेशनल हाईवे-73 सहारनपुर-कुरुक्षेत्र मार्ग पर पुल के साथ लगते बिजली के तार के कारण करेंट से हादसे की आशंका के चलते क्रेन नहीं चलाई गई और कर्मचारी और लेबर खाली बैठे रहे। रेलवे को क्रेन का प्रतिदिन का किराया 40 हजार रुपये देना पड़ रहा है इससे रेलवे को नुकसान हो रहा है।

पुल जोड़ने और स्लैब वर्क में लगेंगे 15-15 दिन
इंजीनियर राजू नालेवाल ने बताया कि पुल का ढांचा पूरी तरह से तैयार है, बस उसे यार्ड में निर्धारित स्पोर्ट पर खड़ा कर जगाधरी रेलवे स्टेशन के पुल से जोड़ना बाकि है। पुराना हमीदा की ओर एनएच-73 पर पुल से लगते बिजली के तारों का अड़ंगा खत्म होने के बाद इस ओर क्रेन की मदद से दो दिन में शेष ढांचा खड़ा कर दिया जाएगा, जबकि स्टेशन की तरफ रेलवे की तीन हाईटेंशन तारों के ऊपर से पुल को गुजारा जाना है। जिसके लिए रेलवे विभाग से अलग-अलग तीन दिन में दो से तीन घंटे का ब्लॉक मांगा जाएगा। इसमें 15 दिन लगने अनुमानित है और इसके बाद पुल के स्लैब वर्क में भी 15 दिन लगेंगे।
वर्जन
पुराना हमीदा की तरफ एनएच-73 सहारनपुर-कुरुक्षेत्र मार्ग पर पुल के साथ लगते बिजली के तार के कारण शुक्रवार को क्रेन से उस ओर पुल का ढांचा नहीं रखा जा सका। इसी कारण से संबंधित क्षेत्र के एसडीओ को पत्र लिखकर दो घंटे के लिए बिजली आपूर्ति बंद करवाने के लिए ब्लॉक मांगा गया था। देर शाम तक इस पर काई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके चलते क्रेन का शुक्रवार को इस्तेमाल नहीं किया जा सका। इसे तीन दिन पहले ही मंगवाया गया है और उसका प्रतिदिन का किराया 40 हजार रुपये है।
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राजू नालेवाल, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, ब्रिज डिपार्टमेंट शकूरबस्ती, नई दिल्ली।

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