भागीरथ के प्रयासों से पवित्र नदी गंगा पृथ्वी पर आई थी। ठीक उसी प्रकार दर्शन लाल जैन (86) भी विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी को धरा पर लाने के लिए पंद्रह वर्षों से प्रयास कर रहे हैं।
भारत सरकार ने आदिबदरी को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दने के बाद अब दर्शन लाल को उम्मीद जगी है कि जल्द ही उनका सपना भी सच साबित हो सकता है।
दर्शनलाल जैन ने वर्ष 1999 में सरस्वती नदी शोध संस्थान की स्थापना की थी। उन्हें इसकी प्रेरणा विख्यात इतिहासकार पद्मश्री डॉ. डब्ल्यूएस वाकंकर से मिली। डॉ. वाकंकर वर्ष 1989 में करीब 30 इतिहासकारों के साथ आदिबदरी आए थे।
इस दौरान उन्होंने शोध के लिए सरस्वती नदी और उसके उद्गम स्थल के बारे में जानकारियां एकत्र की। उनसे प्रभावित होकर दर्शन लाल ने सरस्वती नदी को धरातल पर लाने का बीड़ा उठाया और सरस्वती नदी शोध संस्थान की स्थापना की।
इसके बाद दर्शन लाल ने अंबाला और जगाधरी के पटवार खाने से सरस्वती नदी के मार्ग का रिकार्ड एकत्र किया। सरकारी रिकार्ड के मुताबिक यह नदी आदिबदरी से बिलासपुर और मुस्तफाबाद होते हुए पिहोवा की ओर जाती थी। दर्शन लाल ने सरस्वती पर शोध कर चुके वैज्ञानिकों से संपर्क कर नदी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां और अंतरिक्ष से लिए गए नदी के चित्र एकत्र किए।
उन्होंने अपने मिशन के लिए इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (इसरो), आयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी), नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनजीआरआई) और सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) से संपर्क साधा और उन्हें अपने स्तर पर जुटाई गई जानकारियां उपलब्ध कर्राइं।
यही नहीं, उन्होंने आदिबदरी, जगाधरी, कुरुक्षेत्र, पिहोवा और दिल्ली में सेमिनार और प्रदर्शनी लगाकर लोगों को सरस्वती के महत्व और उसकी वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। इसके अलावा सांसदों और मंत्रियों को भी पत्र लिखकर सरस्वती को पुनर्जीवित करने में मदद की अपील की।
उनकी पहल पर ही प्रदेश सरकार ने सरस्वती नदी के लिए फंड उपलब्ध कराया और आदिबदरी में सरोवर का निर्माण करवाया। उनके प्रयासों से पिहोवा में सरस्वती अतिक्रमण से मुक्त हो पाई।
जैन बताते है कि कुरुक्षेत्र प्रशासन की मदद से उन्होंने पिहोवा वासियों को नदी का पौराणिक महत्व बताते हुए उनसे इस वैदिक नदी से अवैध कब्जे हटाने की अपील की। इसका लोगों पर काफी असर हुआ और उन्होंने न सिर्फ नदी पर किए गए कब्जे हटा लिए, साथ ही कब्जे साफ करने के लिए प्रशासन को संसाधन भी उपलब्ध कराए।
धरा पर आई सरस्वती तो होंगे कई फायदे
जैन बताते है कि आज भी सरस्वती नदी यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, फतेहाबाद और सिरसा में जमीन के आधा किलोमीटर नीचे बह रही है। यदि इसके जल को धरती पर लाया जाए तो प्रदेश में न सिर्फ पेयजल की समस्या दूर होगी, साथ ही खेतों में सिंचाईं और फ्लड कंट्रोल के अलावा पर्यटन का भी विकास हो सकेगा।
इसके लिए प्रदेश में सरस्वती डेवलेपमेंट अथॉरिटी बनाने के लिए वह काफी समय से प्रयासरत हैं। प्रदेश सरकार ने इसके लिए असमर्थता जताई है जिसके बाद वह केंद्र सरकार से पत्राचार कर रहे हैं। जैन ने बताया कि इसके लिए उन्होंने पीएमओ हाउस को कई पत्र लिखे हैं।
खुदाई में मिल चुकी हैं मूर्तियां और बौद्ध विहार
सरस्वती नदी शोध संस्थान द्वारा आदिबदरी के बारे में जुटाई गई जानकारियां मिलने के बाद पुरातत्व विभाग ने आदिबदरी में खुदाई की। इस दौरान यहां प्राचीन काल के बर्तन और पद्मासन अवस्था वाली शिवजी की मूर्ति सहित कुल 21 मूर्तियां यहां निकलीं। इन्हें आदिबदरी में लोगों के दर्शनार्थ रखा गया है। इसके अलावा यहां खुदाई में बुद्ध विहार मिला है, जहां बुद्ध की मूर्ति के आगे चबूतरा बना है।