संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। दो बार हो चुकी ओलावृष्टि, तेज बारिश व तेज हवाओं का असर अब दिखाई दे रहा है। इससे सब्जी उत्पादकों को काफी नुकसान हुआ है। सोम नदी किनारे जिन किसानों ने प्लेज यानि बेल वाली फसल लगाई थी उनसे सब्जी व फल गत वर्ष की अपेक्षा कम मिल रहे हैं। जिससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है।
नौबत यहां तक आ गई है कि जिनकी फसल अच्छी हुई है उनसे खरीद कर दूसरे किसानों को सब्जी बेचनी पड़ रही है। यही वजह है कि जहां पर सब्जी लगाई जाती है वहां बिकने वाली सब्जी के रेट भी इस बार कम नहीं हो रहे। बाजार और नदी किनारे बिकने वाली सब्जी की कीमतों में कोई अंतर नहीं है।
जिले के छछरौली व बिलासपुर क्षेत्र में सोम नदी व अन्य बरसाती नदियों किनारे किसानों द्वारा हर साल प्लेज वाली सब्जी उगाई जाती हैं। जिनमें घीया, तोरी, कद्दू, खीरा, ककड़ी, तरबूज व खरबूजा शामिल हैं। काफी किसान ऐसे भी हैं जो दूसरे राज्यों से आकर यहां सब्जी लगाते हैं। मंडी में बेचने के अलावा वह तोड़ी गई ताजी सब्जी को रेहड़ी व चारपाई आदि पर रख कर सड़क किनारे बेचते हैं।
मंडी से ज्यादा इनकी सब्जी सड़क पर ही बिक जाती है। क्योंकि सब्जी ताजी होती है इसलिए लोग इसे हाथोंहाथ खरीदते हैं। यही वजह है कि हर साल थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लोग सब्जी को बेचते हुए देखे जाते थे। परंतु अभी तक ऐसा कुछ नहीं दिख रहा। मौसम की मार सब्जी उत्पादकों पर पड़ी है।
सहारनपुर निवासी राशिद ने बताया कि वह हर साल मलिकपुर बांगर गांव में सोम नदी किनारे सब्जी लगाते हैं। हर साल सब्जी अच्छी होने से मुनाफा भी अच्छा होता था। परंतु इस साल ऐसा नहीं है। दो बार ओलावृष्टि होने से बेल बीच में से ही टूट गई। इसके अलावा जो फूल आया था वह भी ओले की वजह से झड़ गया। ओलों की चोट नहीं झेल पाने के कारण बेल पर सब्जी कम ही लगी है। अभी तक एक बार भी मंडी में फसल नहीं ले जा पाएं हैं।
कई बार तो दूसरे किसानों से सब्जी खरीद कर सड़क पर बेचनी पड़ रही है ताकि उनके परिवार का खर्च चलता रहे। यही वजह है कि इस बार घीया व खीरा 30-40 रुपये से प्रति किलोग्राम से कम नहीं बिक रहे। दूसरे सब्जी उत्पादकों का भी यही हाल है। अब फिर मौसम खराब बताया जा रहा है। जिससे तेज बारिश हो सकती है। यदि इस बार भी ओलावृष्टि हो गई तो बची हुई सब्जी भी नष्ट हो जाएगी।
मौसम ने काफी नुकसान पहुंचाया : कृष्ण सोलंकी
जिला बागवानी अधिकारी कृष्ण कुमार सोलंकी ने बताया कि इस बार काफी ओलावृष्टि हुई थी। जिससे प्लेज वाली फसल काफी प्रभावित हुई है। जो फसलों भावांतर भरपाई योजना में आती हैं उसका सरकार नियमानुसार मुआवजा देती है।