संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शिक्षण संस्थान की लापरवाही को सेवा में कमी मानते हुए छात्रा के पक्ष में निर्णय सुनाया है। आयोग ने ओरेन इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और उसके फ्रेंचाइजी केंद्र को निर्देश दिए हैं कि वे जोहरीपुरा मोहल्ला जगाधरी की चनप्रीत कौर को 1,45,731 रुपये की फीस सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करें। साथ ही मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न और मुकदमे में खर्च के लिए 11,000 रुपये अतिरिक्त भुगतान करे।
आयोग के सहायक रजिस्ट्रार नीरज वालिया ने बताया कि चनप्रीत कौर ने ओरेन इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के यमुनानगर स्थित फ्रेंचाइजी केंद्र में सौंदर्यशास्त्र और व्यावसायिक मेकअप में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में दो मई 2024 को प्रवेश लिया था। इस कोर्स की अवधि 15 महीने निर्धारित थी जो 1,45,731 रुपये की फीस एकमुश्त जमा करवाई थी। कोर्स 26 जुलाई 2025 तक चलना था।
छात्रा ने करीब एक महीने तक कक्षाएं ली। इसके बाद संस्थान ने कक्षाएं बंद कर दीं।
बार-बार संपर्क करने पर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जुलाई 2024 के अंतिम सप्ताह में जब शिकायतकर्ता ने कंपनी के मुख्यालय चंडीगढ़ से संपर्क किया, तो वहां के अधिकारी लखविंद्र सिंह ने बताया कि यमुनानगर की फ्रेंचाइजी रद्द कर दी गई है। इस संबंध में छात्रों को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।
इसके बाद चनप्रीत कौर ने अगस्त 2024 में एसपी यमुनानगर को शिकायत दी। जांच के दौरान चंडीगढ़ मुख्यालय से बिक्री प्रबंधक के वरिष्ठ सहायक रविंद्र सिंह ने बयान दर्ज कराया कि शिकायतकर्ता ने 1,45,731 रुपये जमा किए थे और कोर्स पूरा होने पर प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। बावजूद इसके न तो कक्षाएं शुरू की गईं और न ही फीस लौटाई गई।
आयोग में सुनवाई के दौरान रविंद्र सिंह ने दलील दी कि शिकायतकर्ता ने सीधे मुख्यालय में प्रवेश नहीं लिया था, बल्कि फ्रेंचाइजी केंद्र यमुनानगर में दाखिला लिया था, जो स्वतंत्र रूप से संचालित होता था। साथ ही यह भी कहा गया कि फ्रेंचाइजी समझौता शिकायतकर्ता द्वारा संपर्क करने से पहले ही समाप्त किया जा चुका था। आयोग ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
आयोग ने माना कि यमुनानगर स्थित शाखा अधिकृत फ्रेंचाइजी थे और फ्रेंचाइजर होने के नाते मुख्यालय परोक्ष रूप से जिम्मेदार है। आयोग ने यह भी पाया कि कंपनी के रिकॉर्ड और पुलिस के समक्ष दिए गए बयान से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता का दाखिला और फीस जमा होने की जानकारी मुख्यालय को थी।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि कोर्स पूरा न कराना, फीस वापस न करना और उचित सहायता न देना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। आयोग की ओर से आदेश में कहा गया है कि ओरेन इंटरनेशनल को 45 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा, अन्यथा देय राशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज लागू होगा।