कहते हैं कि इंसान जिस माहौल में रहेगा, उसका प्रभाव उसकी जिंदगी में भी नजर आएगा। कुछ ऐसा ही एक प्राइवेट कॉलेज के लाइब्रेरियन के साथ हुआ। जिंदगी के 34 साल किताबों के साथ गुजारने वाले शख्स के दिलो-दिमाग पर किताबों ने इतना प्रभाव डाला कि उन्होंने नौ डिप्लोमा और डिग्रियां हासिल कर लीं। इतना ही नहीं रिटायरमेंट के बाद अब वे एक और डिप्लोमा करने की तैयारी में जुट गए हैं।
दवेंद्र सिंह हाल ही में गुरुनानक खालसा कॉलेज से लाइब्रेरी इंचार्ज के पद से रिटायर हुए हैं। उनकी वर्ष 1980 में कॉलेज में लाइब्रेरियन के पद पर नियुक्ति हुई थी। इस दौरान उनका अधिकतर समय लाइब्रेरी की किताबों के साथ गुजरने लगा। दवेंद्र सिंह प्रतिदिन लाइब्रेरी में बैठकर कई घंटे किताबें पढ़ते विद्यार्थियों को देखते थे। इस दौरान उन्हें भी किताबें पढ़ने का शौक जागा।
उन्होंने लाइब्रेरी में मौजूद जाने-माने लेखकों और कवियों की सभी रचनाएं पढ़ डालीं। इसके बाद भी उनकी पढ़ने की जिज्ञासा शांत नहीं हुई। तब देवेंद्र सिंह ने विभिन्न विषयों में पढ़ाई करने की ठानी। किसी एक विषय में डिप्लोमा करने के बाद दूसरे विषय की पढ़ाई करने में जुट गए। इस तरह उन्होंने नौ डिप्लोमा और डिग्रियां हासिल कर लीं। पिछले महीने दवेंद्र सिंह लाइब्रेरी इंचार्ज के पद से रिटायर्ड हुए हैं। इन दिनों वे अपना समय घर पर गुजार रहे हैं, लेकिन पढ़ाई का जुनून अब भी उनके सिर पर सवार है। दवेंद्र सिंह बताते हैं कि अब वे डिप्लोमा इन ट्रांसलेशन करने की तैयारी कर रहे हैं।
दवेंद्र सिंह द्वारा हासिल किए गए डिप्लोमा और डिग्रियां
सर्टिफिकेट इन लाइब्रेरी साइंस
बैचुलर इन लाइब्रेरी साइंस
मास्टर इन लाइब्रेरी साइंस
एम. फिल इन लाइब्रेरी साइंस
एमए पंजाबी
डिप्लोमा इन जर्नलिज्म
डिप्लोमा इन पर्सनल मैनजमेंट एंड लेबर वेलफेयर
डिप्लोमा इन पब्लिक रिलेशन एंड एडवरटाइजिंग
पीएचडी इन लाइब्रेरी साइंस