संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग में साध्वी नीलम भारती ने श्रद्धालुओं को गुरु का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि यदि इस संसार में कहीं परमात्मा है तो वह गुरु रूप में विद्यमान है।
साध्वी ने कहा कि हमें जन्म देने वाली माता हमारी प्रथम गुरु भी हैं। वे भी परमेश्वर का रूप हैं और हमारा पालन पोषण करने वाले पिता भी गुरु हैं, जो हमें जीवन जीने का ढंग सिखाते हैं। हमारे जीवन में मिलने वाली सीख जहां से आती है उस स्रोत को गुरु कहा गया।
उन्होंने बताया कि भगवान दत्तात्रेय ने 24 गुरु बनाए, जिनमें प्रकृति के पांचों तत्व, जीव जन्तु, बालक, स्त्री सभी को उन्होंने गुरु रूप में देखा। भगवान दत्तात्रेय ने समझाया कि यदि हमारे भीतर सच्चा शिष्यत्व है, तो हम उस गुरु परमेश्वर को अपने आसपास खोज लेते हैं। चूंकि गुरु एक स्थान पर सीमित रहने वाली सत्ता नहीं है, अपितु वह कण-कण में विद्यमान अलौकिक शक्ति है जो समय, स्थान व स्थिति के अनुसार साकार स्वरूप में प्रकट होकर संपूर्ण मानव जाति को सत्य व धर्म का संदेश देती है।
गुरु सत्ता मन के विकारों का त्याग मांगती है और यह एक कटु सत्य है कि हम अपने मिथ्या अहंकार और मन के विकारों को छोड़ना नहीं चाहते हैं। जिस तरह विशेष बीमारी ठीक करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक होती है उस प्रकार अध्यात्मक के लिए ब्रह्मगुरु की आवश्यकता होती है।
इसमें संदेह नहीं कि गुरु ही परमेश्वर है, परंतु उनका परमेश्वर स्वरूप सबके सन्मुख प्रकट नहीं होता, वह केवल ब्रह्मज्ञान के द्वारा आत्म साक्षात्कार करके ही अनुभव किया जा सकता है। सत्संग में साध्वियों ने भजनों से गुरु महिमा का गुणगान किया। सत्संग में साध्वियों ने भजनों से गुरु की महिमा का गुणगान किया।