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Yamuna Nagar News: शिक्षकों की कमी के कारण राजकीय स्कूल में पढ़ाई हुई चौपट

Fri, 17 Apr 2026 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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साढौरा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल का मुख्य गेट। संवाद - फोटो : Archive
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साहिल घई, साढौरा। सरकार ने शिक्षा का स्तर सुधारने तथा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी सीबीएसई पैटर्न पर शिक्षा देने की मंशा से कस्बे के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल को पांच साल पहले मॉडल संस्कृति स्कूल का दर्जा दिया था। लेकिन केवल नाम बदलने के अलावा यहां शिक्षकों की तैनाती न किए जाने से स्कूल में पढ़ाई चौपट हो चुकी है। यहां शिक्षकों की कमी का आलम यह है कि नौवीं से बारहवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां पीजीटी शिक्षकों के 30 पदों में से 15 पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं छठी कक्षा से आठवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाने के लिए टीजीटी शिक्षकों के पद तो 16 स्वीकृत हैं। लेकिन यहां केवल 7 ही शिक्षक कार्यरत हैं। इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद रिक्त होने से पढ़ाई चौपट होना निश्चित है।
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पीजीटी के 30 में से 15 तो टीजीटी के 16 में से 7 पद रिक्त:
राजकीय स्कूल में नौवीं से बारहवीं कक्षा के बच्चों को गणित पढ़ाने के लिए स्वीकृत तीन में से एक पद खाली हैं। अंग्रेजी के पांचों पद लंबे समय से रिक्त हैं। हिन्दी के तीन में से दो पद रिक्त हैं। राजनैतिक विज्ञान के दो पद स्वीकृत हैं। लेकिन तैनाती एक की भी नहीं है। अर्थशास्त्र, संगीत, शारीरिक शिक्षा व कंप्यूटर शिक्षा के एक-एक पद स्वीकृत हैं लेकिन तैनाती कोई नहीं है। इतिहास के दो पदों में से एक पर एचकेआरएन का शिक्षक तैनात है तो दूसरा पद रिक्त है। वाणिज्य के एकमात्र पद पर भी एचकेआरएन का शिक्षक तैनात है। छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाने के लिए एलिमेंटरी स्कूल के मुखिया के अलावा ड्रांईग, पंजाबी व संस्कृत का एकमात्र तथा हिन्दी के दो में से एक पद रिक्त हैं। अंग्रेजी व गणित के दो में से एक पद रिक्त है तो गणित के एक पद पर एचकेआरएन के तहत तैनाती है।
अभिभावक भी हुए परेशान:
अभिभावकों राजेंद्र, सुशील, जगमान व अनिल ने बताया कि अधिकतर विषयों का एक भी शिक्षक न होने के कारण अधिकतर बच्चों की इन विषयों में कंपार्टमेंट आई है। पास प्रतिशत बहुत कम होने से अभिभावक भी बहुत चिंतित है। शिक्षकों की कमी के विरोध में अभिभावक स्कूल के बाहर प्रदर्शन करने के अलावा शिक्षा विभाग से यहां शिक्षकों की तैनाती करने की बार-बार मांग कर रहे हैं। लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा इस तरफ कोई ध्यान न दिए जाने से अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में मंहगी फीस चुकाकर पढ़ाने को मजबूर हो रहे हैं। या फिर बच्चों को प्राइवेट कोचिंग का सहारा लेना पड़ रहा है। यही कारण है कि इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों की संख्या में निरंतर कमी आ रही है। 2022 में इस स्कूल में 940 बच्चे पढ़ते थे तो 2023 में इनकी संख्या 750, 2024 में 526 और 2025 में घटकर 506 ही रह गई। अभी तक केवल 300 बच्चों ने ही यहां दाखिला लिया है।
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विभाग को अवगत करवा राख है: गुरदीप गुलाटी
प्रिंसिपल गुरदीप गुलाटी ने बताया कि शिक्षकों की कमी बारे शिक्षा विभाग के जिला से लेकर राज्य स्तर के अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है। जिला परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष अनिल संधू ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण इस स्कूल की शिक्षा का ढांचा चरमराता जा रहा है। शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। सरकार सीबीएसई का दर्जा देने की वाहवाही पाने का प्रयास कर रही है लेकिन यहां शिक्षकों की कमी को दूर करने के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रही है।
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