संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। विद्यार्थियों को पहले घर से स्कूल, कॉलेज जाने की चिंता और इसके बाद लौटने की टेंशन। खासकर दोपहर के समय तो विद्यार्थियों को खासी परेशानी करनी पड़ रही है। बस स्टैंड यमुनानगर व जगाधरी पर दोपहर एक बजे से तीन बजे के बीच बसों की कमी न केवल विद्यार्थियों बल्कि अन्य यात्रियों के लिए भी मुसीबत बन गई है। विद्यार्थियों की मांग के बावजूद बसों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की जा रही है।
कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की छुट्टी जब दोपहर को होती है तो उन्हें घर जाने के लिए बस नहीं मिल रही। उन्हें बस के लिए बहुत इंतजार करना पड़ता है। वहीं इसके विपरीत दोपहर में रोडवेज से ज्यादा सहकारी समिति की निजी बसें ज्यादा हैं। निजली बसें यात्रियों को बैठा ले जाती हैं, लेकिन विद्यार्थी वहीं खड़े घर की राह ताकते रहते हैं। रोडवेज की बस नहीं आती।
ऐसे में विद्यार्थियों को घर पहुंचने में अंधेरा हो जाता है। यह बसों की कमी का ही नतीजा था कि गत सप्ताह प्रतापनगर बस स्टैंड पर एक छात्रा को अपनी जान देकर कीमत चुकानी पड़ी, जबकि कई हादसे में बाल-बाल बच गई। रणजीतपुर निवासी राहुल व सन्नी ने बताया कि वह रोजाना रोडवेज बस से पढ़ाई के लिए यमुनानगर शहर के कॉलेज में जाते हैं।
सुबह भी वह कॉलेज में समय पर नहीं पहुंच पाते। जब कॉलेज जाते हैं तो पहला लेक्चर वह लगा ही नहीं पाते। कभी इसमें देरी से पहुंचते हैं। इसके बाद दोपहर को है। छुट्टी के बाद जब बस स्टैंड यमुनानगर पर जाते हैं तो वहां भी बस के लिए बहुत इंतजार करना पड़ता है। दोपहर में सरकारी से ज्यादा प्राइवेट बस चलती है। वह औसतन दोपहर में दो बजे बस स्टैंड पर पहुंच जाते हैं, लेकिन घर पहुंचने में उन्हें साढ़े चार से पांच बज जाते हैं। ऐसी स्थिति में वह अपनी पढ़ाई कैसे करें।
बसों की कमी के बारे में मुख्यालय को अवगत कराया है। यदि दोपहर में किसी रूट पर बसों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है तो वहां पर बस लगा दी जाएगी। - संजय रावल, महाप्रबंधक, यमुनानगर डिपो।
यमुनानगर डिपो पर बस में चढ़ने के लिए जद्दोजहद करते विद्यार्थी। संवाद