संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। प्री मानसून से पहले नगर निगम नालों की सफाई में जुट गया है। इस काम का ठेका देने के लिए गत वर्षों की तरह 11-11 वार्डों के दो जोन बनाने के बजाय निगम अफसरों ने सभी 22 वार्डों का एक ही जोन बनाया है। इस काम का ठेका करीब 50.33 लाख रुपये में अलॉट किया है।
उधर, एजेंसी ने नालों की सफाई का काम भी शुरू कर दिया है। जिस पर निगम अफसरों का दावा है कि 15 दिन में पहले चरण में नालों की सफाई पूरी हो जाएगी। निवर्तमान पार्षद इस दावे को सिरे से नकार रहे हैं।
ठेका देने के लिए भले एक जोन रहा पर इसके तहत नालों की सफाई कराने को दो जोन बनाए हैं। जोन एक में वार्ड एक से सात और जोन दो में वार्ड आठ से 22 वार्ड शामिल है। जोन एक में सीएसआई हरजीत व जोन दो में सीएसआई सुनील दत्त के नेतृत्व में सफाई निरीक्षक नालों की सफाई की देखरेख कर रहे हैं।
गुरुवार को जोन दो में नालों की सफाई हुई। ऐसे ही शुक्रवार को जोन एक में नालों की सफाई होगी। निगम अफसरों का कहना है कि पहले चरण में नालों की सफाई 15 दिन में पूरी हो जाएगी।
नालों की नियमित सफाई के साथ-साथ सील्ट उठाना व घास फूंस साफ करना भी एजेंसी की जिम्मेदारी है। इसके लिए जेसीबी व कर्मचारी लगाए हैं। इसके अलावा मानसून के दौरान निचले इलाकों में भरने वाले पानी को निकालने के लिए पंप लगाए जाएंगे।
नगर निगम यमुनानगर व जगाधरी क्षेत्र में छोटे-बड़े 32 नाले हैं। इनकी लंबाई लगभग 84 किलोमीटर है। मुख्य नाला जगाधरी से निकलकर सेक्टर 17 होते हुए प्रोफेसर कॉलोनी, मॉडल टाउन, टैगोर गार्डन, लाजपत नगर सहित अन्य कालोनियों से होकर पश्चिमी यमुना नहर किनारे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में जा रहा है। इसके अलावा आजाद नगर, दशमेश कॉलोनी, बाड़ीमाजरा रोड, औद्योगिक क्षेत्र व जगाधरी में गौरीशंकर मंदिर कॉलोनी, देवीभवन बाजार, श्मशान घाट रोड, सिविल लाइन, गांधीधाम, मटका चौक से बर्तन बाजार व अन्य नाले हैं।
देरी से शुरू किया गया काम ः निवर्तमान पार्षदों में रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान ने कहा कि नालों की सफाई कई पहले शुरू होनी चाहिए थी। अब 11 दिन बाद मानसून है, तब नालों की सफाई हो रही है अफसरों के बताए जा रहे 32 नालों में कई नालों की सफाई पर दो से तीन दिन भी कम हैं।
नालों में न डाले ठोस कचरा : सिन्हा
नगर निगम आयुक्त आयुष सिन्हा ने लोगों से अपील की कि घर व दुकान से निकलने वाले ठोस कचरे को नालों में न डालें। इससे नाले अवरूद्ध होते हैं और ओवरफ्लो होकर नालों का गंदा पानी सड़कों व गलियों में बहता है।