संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मानसून की बारिश में जगाधरी से यमुनानगर आ रहा बड़ा नाला गत वर्षों की तरह ओवरफ्लो होकर आसपास की कॉलोनियों में जलभराव की वजह बन सकता है। कराण नाले के पानी को यमुनानगर की कॉलोनियों से पुराने एनएच-73 पर ड्रेन डाल डायवर्ट करने की जल निकासी परियोजना अधूरी है।
अमरुत स्कीम में नगर निगम ने वर्ष-2019 में काम शुरू कर दिया था। वहीं पांच साल में यह पूरा नहीं हुआ। अभी भी चांदपुर समीप ड्रेन नहीं बन पाई है। इस हिस्से के दोनों ओर करीब ड्रेन डालने पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। बावजूद इसके मानसून में शहर को जलभराव से बचाने में ड्रेन पूरी तरह काम न आने पर वार्ड पार्षद अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
कन्हैया साहिब चौक से जम्मू कॉलोनी के एसटीपी तक इस स्टॉर्म ड्रेन का काम अमृत (अटल मिशन रेजुवेनशन एंड ट्रांसपोर्टेशन) स्कीम में नगर निगम करवा रहा है। ड्रेन के जरिये जगाधरी से आ रहे बड़े नाले का पानी यमुनानगर की कॉलोनियों के बजाय आउटर में पुराने एनएच-73 पर ड्रेन डाल डायवर्ट करना था।
इससे नाला बारिश के दिनों में क्षमता से अधिक पानी आने पर ओवरफ्लो होकर यमुनानगर की कॉलोनियों में जलभराव की वजह न बने। इसके लिए 4500 मीटर लंबी ड्रेन का काम 24 फरवरी 2019 को शिलान्यास हुआ। इस काम को पहले 15 अगस्त 2019 में पूरा करने का लक्ष्य था। बार-बार समय अवधि बढ़ने के बावजूद यह अब तक अधूरा है। चांदपुर आरओबी समीप 280 मीटर हिस्से में ड्रेन का काम बाकी है।
काम में देरी के लिए अफसर जिम्मेदार : रामआसरा
वार्ड नंबर से पार्षद रामआसरा भारद्वाज, वार्ड-8 से पार्षद विनोद मरवाह ने कहा कि अफसरों ने पहले टेंडर व वर्क अलॉट किया फिर दूसरों विभागों से एनओसी लेने से लेकर अन्य औपचारिकताएं पूरी की। यह बड़ी वजह है कि ड्रेन चार साल बाद भी अधूरी है। अगर टेंडर व वर्क अलॉट से पहले यह काम होते, तब ऐसा ना होता।
ड्रेन के बारे में संबंधित अफसर से बात की जाएगी। जहां कहीं काम बाकी है, उसका कारण जानकर पूरा कराने का प्रयास होगा।- आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।