यमुनानगर।
हर वर्ष की तरह इस बार भी मानसून से पहले नगर निगम अफसर जल निकासी के प्रबंधों पर दफ्तरों में मंथन करने से लेकर फील्ड तक सक्रिय नजर आ रहे हैं। किंतु यमुनानगर बस स्टैंड के साथ वर्कशॉप रोड व चांदपुर बाईपास रोड से लगते निचले इलाके के काफी लोगों को सरकारी स्तर पर जल निकासी के प्रबंधों पर भरोसा नहीं। यही कारण है कि जलभराव से बचाव के लिए वो खुद अपने घरों व दुकानों के आगे एक से ढाई फीट ऊंची दीवारें बना रहे हैं।
इस तरह लाजपत नगर, विजय कॉलोनी व जसवंत कॉलोनी में सैकड़ों घरों व दुकानों के आगे दीवारें बन गईं हैं। उनका आरोप है कि दो दशक में कई आईएएस व इंजीनियर आए, पर यहां जलभराव की दिक्कत दूर नहीं कर पाए, इसलिए उन्हें खुद इंतजाम करने पड़ रहे हैं। उधर, निगमायुक्त आयुष सिन्हा का कहना है कि मानसून में जलभराव से बचाव व जल निकासी के पुख्ता प्रबंध किए जाएंगे।
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हर साल जलभराव और जलजनित बीमारियों के शिकार होते हैं लोग
जसवंत कॉलोनी के रवि गुप्ता ने कहा कि हर मानसून में यहां के लोग पहले एक से ढाई फीट तक जलभराव के हालात झेलते हैं। इसके बाद बच्चों से लेकर बड़े तक मच्छर व गंदगी जनित रोगों से ग्रस्त होते हैं। ऐसा हर साल होता है और इस बार भी होने की आशंका है। क्योंकि न तो नालियां और न गलियां साफ हो रही हैं और न जलनिकासी के आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। स्थिति यह है कि नालियों और गलियों का कचरा भी क्षेत्रवासी खुद साफ करने को मजबूर हैं।
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दीवारें बनाने के बाद भी घरों में घुसता है गंदा पानी, रोकथाम के नहीं उपाय
विजय कॉलोनी के कुलदीप वर्मा ने कहा कि मानसून में गलियों में भरने वाले बारिश का पानी घरों में न घुसे, इसके लिए काफी लोगों ने घरों-दुकानों के आगे दीवारें बना दी हैं। इसके बाद भी नालियों व सीवर का गंदा पानी घरों में बैक मार घुस जाता है। यह समस्या को हर साल क्षेत्रवासियों को झेलनी पड़ती है, लेकिन अधिकारियों की ओर से आज तक कोई पुख्ता उपाय नहीं किए गए हैं।
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बच्चे स्कूल और बड़े काम नहीं जा पाते, महिलाएं पानी निकालने में लगी रहती हैं
विजय कॉलोनी के विकास जैन ने बताया कि जुलाई-अगस्त में बारिश के दौरान गलियों में एक से ढाई फीट तक जलभराव रहता है, जो कई घंटों बाद उतरता है। इस बीच बच्चे स्कूल और बड़े नौकरी व काम पर नहीं जा पाते। बारिश के बाद महिलाएं, बच्चों सहित घरों में घुसे पानी को निकालने में लग जाते हैं। घरों में पानी घुसने से काफी सामान खराब हो जाता है। निगम की ओर से निचले इलाकों में पंप सेट दिए जाने की बातें हो रही हैं पर अभी तक ऐसा नहीं हुआ। मांग है कि बारिश आने से पहले पंप सेट पहुंचाए जाएं।
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मरीजों को अस्पताल और शव श्मशान ले जाना भी हो जाता है मुश्किल-
लाजपत नगर के किशन ने कहा कि बरसात में करीब दो माह यहां के लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। विवाह व अन्य शुभ कार्य हो नहीं पाते। किसी के दुख में भी बारिश व जलभराव का खलल रहता है। ढाई फीट जलभराव होने की स्थिति में मरीज को अस्पताल और शव को श्मशान ले जाना भी मुश्किल हो जाता है। ये स्थिति दो दशक से है। इस बीच कई आईएएस व इंजीनियर आए पर हालात न बदल पाए।
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