संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर की रिहायशी कॉलोनियों के अंदर व सड़कों किनारे जगह-जगह चिकन की दुकानें खुली हुई हैं। जिनके आगे सारा दिन कुत्ते झुंड बनाकर बैठे रहते हैं। शाम को दुकानदार मांस व चिकन के अवशेष आसपास सड़क किनारे या फिर खाली प्लॉटों में फेंक देते हैं। कुत्ते इन अवशेषों को खाने के लिए दूर से ही दौड़े आते हैं। जब कुत्तों को खाने को मांस व अवशेष नहीं मिलता तो वह लोगों के पीछे दौड़ रहे हैं।
शहर की कॉलोनियों में चिकन की दुकानों पर सुबह से रात तक जो बेसहारा कुत्ते घूमते रहते हैं उसके लिए भी नगर निगम के अधिकारी ही जिम्मेदारी हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि शहर की किसी भी रिहायशी कॉलोनी और सड़कों किनारे चिकन बेचा ही नहीं जा सकता। चिकन बेचने के लिए यमुनानगर के इंडस्ट्रियल एरिया और जगाधरी के गुलाब नगर में मीट मार्केट है।
इनके अलावा कहीं भी शहर में चिकन बेचने की अनुमति नहीं है। फिर भी शहर में जगह-जगह सरेआम चिकन बेचा जा रहा है। काफी लोग तो रिक्शा में मुर्गे व सामान लेकर आते हैं और सड़कों किनारे टेबल रख कर बैठ जाते हैं। ऐसे लोग तो मुर्गों की कटाई भी खुले में ही कर रहे हैं। जिससे वहां से गुजरने वाले लोगों की भावनाएं भी आहत होती हैं। दुकानदारों द्वारा चिकन के जो अवशेष खुले में डाले जाते हैं उन्हें खाने के लिए कुत्तों की आपस में लड़ाई होती है। जिससे वह हिंसक होते हैं। कई बार तो कुत्ते चिकन के अवशेषों को उठाकर रिहायशी क्षेत्र में पहुंच जाते हैं।
मीट मार्केट में भी हालात ठीक नहीं हैं। मीट मार्केट में चिकन व मटन की दर्जनों दुकानें हैं। काम खत्म होने के बाद मीट मार्केट के दुकानदार अवशेषों को खुले में ही फेंक रहे हैं। यहां तो सड़कों पर ही अवशेषों को डाला जा रहा है। जिनमें सारा दिन कुत्तों को मुंह मारते हुए देखा जा सकता है। मीट मार्केट के पास ही मछली मार्केट भी है। यहां भी अवशेषों को खुले में डाला जा रहा है। इससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। खुले में अवशेष डाले जाने से आसपास दुर्गंध का वातावरण रहता है।
मीट मार्केट के अलावा अन्य जगहों पर चिकन बेचने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। चिकन बेचने के लिए नगर निगम ने जगह निर्धारित कर रखी है। - अनिल नैन, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर निगम।