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Yamuna Nagar News: डॉक्टरों की कुर्सियां खाली, इंतजार में मरीज बेहाल

Tue, 09 Jun 2026 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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बंद पड़ी डॉक्टर के केबिन के बाहर लगी टोकन मशीन। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिला नागरिक अस्पताल में रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी। वहीं व्यवस्थाएं भीड़ के दबाव के आगे नाकाफी नजर आईं। ओपीडी की पर्ची बनवाने से लेकर डॉक्टरों से परामर्श लेने तक मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ा। कई विभागों में डॉक्टर अपनी सीटों पर नहीं मिले। मरीज उनके कमरों के बाहर इंतजार करते रहे।
सुबह से ही अस्पताल परिसर में मरीजों और तीमारदारों की भीड़ दिखाई दी। पर्ची काउंटर पर लंबी लाइन लगी रही। पर्ची बनवाने के बाद भी मरीजों की परेशानी कम नहीं हुई। डॉक्टरों के केबिन के बाहर भी दर्जनों मरीज अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। सबसे ज्यादा परेशानी हड्डी रोग विभाग में देखने को मिली।
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अस्पताल में तीन हड्डी रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। सोमवार को केवल एक ही डॉक्टर अपनी सीट पर मौजूद मिले। बाकी दो डॉक्टरों के कमरों के बाहर मरीज इंतजार करते रहे। डॉक्टरों के आने-जाने का कोई निश्चित समय नहीं है। कई बार डॉक्टर बिना सूचना के सीट छोड़कर चले जाते हैं, जिससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल कर्मचारियों के पास भी डॉक्टरों की वापसी को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं होती।
अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए लगाया गया टोकन सिस्टम भी बंद पड़ा मिला। यह व्यवस्था इसलिए शुरू की गई थी ताकि मरीजों को अपनी बारी की जानकारी मिल सके और उन्हें अनावश्यक भीड़ में खड़ा न रहना पड़े। फिलहाल कर्मचारी पर्चियों पर हाथ से नंबर लिखकर मरीजों को दे रहे हैं, जिससे अव्यवस्था और बढ़ रही है।
गर्मी के मौसम में अस्पताल की सेंट्रल एसी व्यवस्था भी मरीजों को राहत नहीं दे सकी। भीड़ के बीच एसी बंद होने से मरीज और तीमारदार पसीने से तरबतर नजर आए। कई लोग अपनी पर्चियों और कागजों से खुद को हवा करते दिखाई दिए। बुजुर्गों और दिव्यांग मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
कई लोगों ने आरोप लगाया कि लंबी प्रतीक्षा के बाद डॉक्टर से जांच कराने के बावजूद अस्पताल से सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हो रहीं। मरीजों को कुछ दवाएं बाहर की मेडिकल दुकानों से खरीदने के लिए कहा जा रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

बाहर से दवा खरीदने के लिए कहा
राजेश ने बताया कि उसे एलर्जी की समस्या है। सुबह करीब साढ़े नौ बजे अस्पताल पहुंच गया था। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि नंबर आने में काफी समय लग गया। करीब साढ़े 11 बजे डॉक्टर से जांच हो सकी। इसके बाद काउंटर पर गया तो केवल एक दवा ही मिली। बाकी दवाएं बाहर से खरीदने के लिए कहा गया।
बिना चेकअप के ही दवा लेनी पड़ी
तेजली निवासी किशनराम ने बताया कि वह दिव्यांग हैं। टांग में जख्म होने के कारण दवा लेने अस्पताल आए थे। काफी देर इंतजार करने के बाद भी डॉक्टर अपनी सीट पर नहीं मिले। कर्मचारियों को भी जानकारी नहीं थी कि डॉक्टर कब आएंगे। मजबूरी में पर्ची पर तारीख डलवाकर दोबारा दवाई लेनी पड़ी। बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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रविवार की छट्टी के बाद अस्पताल में मरीजों की भीड़ ज्यादा हो जाती है। डॉक्टरों को निर्देश दे रखे हैं कि वह ड्यूटी के समय सीट पर रहें। अस्पताल में यदि किसी दवा की कमी है तो इस बारे में पीएमओ से रिपोर्ट ली जाएगी। - डॉ. दिव्या मंगला, कार्यवाहक सिविल सर्जन।

बंद पड़ी डॉक्टर के केबिन के बाहर लगी टोकन मशीन। संवाद

बंद पड़ी डॉक्टर के केबिन के बाहर लगी टोकन मशीन। संवाद

बंद पड़ी डॉक्टर के केबिन के बाहर लगी टोकन मशीन। संवाद

बंद पड़ी डॉक्टर के केबिन के बाहर लगी टोकन मशीन। संवाद

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