संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान जिला नागरिक अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से भगवान भरोसे चल रही है। करीब 105 करोड़ रुपये की लागत से बने 200 बेड के इस अत्याधुनिक अस्पताल में मरीजों, तीमारदारों और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए एक भी कर्मचारी तैनात नहीं है।
हालात यह हैं कि अस्पताल परिसर में कोई भी व्यक्ति कहीं भी आ-जा सकता है और उसे रोकने या पूछताछ करने वाला कोई नहीं है। सुरक्षा प्रबंधों के अभाव में अस्पताल से अब तक लाखों रुपये का सामान चोरी हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया है। वहीं इसके विपरीत जगाधरी के उप जिला नागरिक अस्पताल में सिक्योरिटी गार्ड है, लेकिन जिला अस्पताल में न होना कई सवाल खड़े करता है।
अस्पताल में प्रतिदिन 2000 से ज्यादा मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ओपीडी, इमरजेंसी, वार्ड और विभिन्न जांच केंद्रों में लगातार लोगों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद पूरे अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था का अभाव गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। अस्पताल प्रशासन के पास न तो पर्याप्त सुरक्षा कर्मी हैं और न ही ऐसी कोई प्रभावी व्यवस्था, जिससे अस्पताल की संपत्ति और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने के कारण अस्पताल चोरों का आसान निशाना बन गया है। अस्पताल परिसर से कई बार बाइक चोरी हो चुकी हैं। इसके अलावा ऑक्सीजन सिलिंडर, खिड़कियां, दरवाजे और अन्य उपयोगी सामान भी चोरी होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं से सरकारी संपत्ति को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। बावजूद इसके सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कोई ठोस कदम दिखाई नहीं दे रहा।
अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। अस्पताल में किसी भी व्यक्ति की पहचान या गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मरीजों के सामान और वाहनों की सुरक्षा को लेकर हमेशा आशंका बनी रहती है। विभाग की ओर से अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन सुरक्षा जैसे बुनियादी विषय की अनदेखी पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है।
सुरक्षा कर्मचारी उपलब्ध कराने के लिए मुख्यालय को खिलाफ है। कर्मचारी तैनात करने का निर्णय मुख्यालय से ही होता है। - डॉ. दिव्या मंगला, कार्यवाहक सिविल सर्जन, यमुनानगर।