संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। राजस्थान में विद्यालय हादसे के बाद शिक्षा निदेशालय बेहद गंभीर नजर आ रहा है। विभाग ने जिले के सभी स्कूलों से उनकी इमारतों की मौजूदा स्थिति, खस्ताहाल भवनों, कमरों व अन्य जानकारी मांगी है। साथ ही जिले अधिकारियों को स्कूलों के निरीक्षण कर भवनों की स्थिति देखने के निर्देश दिए हैं।
जिला शिक्षा विभाग की ओर से मरम्मत करवाने व निर्माण संबंधी करीब 24 स्कूलों की जानकारी निदेशालय भेजी है। इसके अलावा अब 20 साल पुराने भवनों की रिपोर्ट भी बनाई जा रही है। विभाग ने विद्यालयों के जर्जर कक्षों, भवन व हिस्सों का प्रयोग न करने के आदेश दिए हैं। जहां ऐसे भवनों का प्रयोग हो रहा है, उन्हें तुरंत प्रभाव से बंद करने को कहा गया है।
यही नहीं जिन स्कूल के मुख्य भवन खस्ताहाल हैं उनके लिए अस्थायी तौर पर विकल्प देखा जाएगा और प्राथमिकता से भवन की मरम्मत करवाई जाएगी। राजस्थान के झालावाड़ में राजकीय विद्यालय की छत गिरने से सात बच्चों की मौत के बाद अभिभावक अपने बच्चों को खस्तहाल स्कूल में भेजने से डर रहे हैं। वहीं, इस हादसे के बाद विभाग भी गंभीर हो गया है।
जिले में जर्जर भवन वाले स्कूलों की संख्या करीब 24 है। वहीं छह से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं, जिनकी हालात बेहद खराब हैं और कभी भी हादसा हो सकता है। जिले के इन स्कूलों में करीब 2500 विद्यार्थी पढ़ते हैं। विभाग ने भवन के जर्जर हिस्से का प्रयोग बंद करने के आदेश दिए हैं।
वहीं कुछ स्कूल ऐसे हैं, जिनका भवन छोटा है और सभी कमरों की छतों से बारिश में पानी टपकता है। इनके लेंटर सहित दीवारों में दरार आ चुकी है। स्कूलों ने इसके लिए बजट की मांग की है, लेकिन निदेशालय से बजट पास नहीं किया गया है। ऐसे में विभाग ने इस पर एहतियात बरतने के आदेश दिए हैं।
जिले से जिन स्कूलों ने मरम्मत व निर्माण संबंधी कार्यों के लिए फंड मांगा है, उन सभी का एस्टीमेट तैयार कर निदेशालय भेज दिया गया है। निदेशालय की ओर से जल्द ही बजट जारी किया जाएगा। वहीं जिले के ऐसे स्कूलों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिनमें कक्ष व भवन खस्ताहाल हैं। भवन के जर्जर हिस्से व कक्षों का प्रयोग न करने के आदेश दिए हैं। - धर्मेंद्र चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी।