यमुनानगर। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी अब डिजिटल एक्सरे की सुविधा मिलेगी। इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलासपुर, प्रतापनगर व अलाहर में एक-एक डिजिटल एक्सरे मशीन लगाई जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को तीन डिजिटल एक्सरे मशीनें खरीदने के लिए 25 लाख रुपये मिले हैं।
यह राशि विभाग को केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत दी गई है। टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग जल्द ही तीन मशीनों की खरीद करेगा। नई मशीनें आने के बाद ग्रामीण क्षेत्र की पांच लाख से ज्यादा आबादी को फायदा होगा। जिले में फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की तरफ से मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल के अलावा सब डिवीजन अस्पताल जगाधरी में ही मरीजों के लिए डिजिटल एक्सरे मशीनें हैं।
इनके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में किसी भी सीएचसी व पीएचसी में एक्सरे की मशीन नहीं है। डेढ़ दशक पहले तक सीएचसी बिलासपुर में एक्सरे होता था, लेकिन मशीन बहुत पुरानी थी जो अक्सर खराब हो जाती थी। खराब हुई मशीन को ठीक कराने के लिए दोबारा किसी ने जहमत नहीं उठाई। इसलिए अब ग्रामीण क्षेत्र में कहीं भी मरीजों को एक्सरे की सुविधा नहीं है।
लोगों को एक्सरे कराने के लिए जिला अस्पताल व सब डिवीजन अस्पताल जगाधरी में जाना पड़ता है। यदि किसी मरीज को जिले के आखिरी गांव से आना पड़ जाए तो उसे 45 किलोमीटर तक की भागदौड़ करनी पड़ती है। जिसके लिए उन्हें समय और पैसा दोनों खर्च करने पड़ते हैं। इतना ही नहीं एक्सरे कराने के लिए परिवार से या फिर किसी अन्य को भी साथ ले जाना पड़ता है।
इसके लिए ओपीडी की पर्ची बनवाने से लेकर डॉक्टर से चेकअप करवाने और फिर फीस जमा कराने के बाद एक्सरे हो पाता है। जिसमें पूरा दिन लग जाता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में एक्सरे होने से मरीजों जिला व सब डिवीजन अस्पताल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उक्त जगहों पर मशीनें लगने से केवल तीन ब्लॉक के मरीजों को ही फायदा नहीं होगा बल्कि साढौरा खंड के लोग बिलासपुर, छछरौली के प्रतापनगर व रादौर व जठलाना क्षेत्र के अलाहर में एक्सरे करवा सकेंगे। संवाद
गत सप्ताह ही जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) की बैठक डीसी कैप्टन मनोज कुमार की अध्यक्षता में हुई थी। जिसमें एक्सरे मशीनों के लिए स्वास्थ्य विभाग को 25 लाख रुपये दिए। एक्सरे मशीनें प्रतापनगर, बिलासपुर व अलाहर सीएचसी में लगाई जाएंगी। जल्द ही यह एक्सरे मशीनें खरीद ली जाएंगी। - डॉ. मंजीत सिंह, सिविल सर्जन यमुनानगर।