संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से सिविल लाइन स्थित शिबूमल धर्मशाला में एक दिवसीय ध्यान साधना शिविर लगाया गया। शिविर में स्वामी मोहनपुरी ने श्रद्धालु को ध्यान साधना का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि मानव तन सृष्टि की सर्वश्रेष्ठ संरचना है। इसलिए मानव को ही सृष्टि का सिरमौर कहा गया है। परंतु आज मानव जीवन ही सबसे अधिक दुख, पीड़ा व कष्टों का सामना कर रहा है। चूंकि कोई भी वृक्ष अपने मूल से अलग होकर अधिक समय तक हरा भरा नहीं रह सकता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह मनुष्य का जीवन भी अपने मूल आधार से टूट चुका है। ब्रह्मज्ञान से आत्म साक्षात्कार करना ही मानव जीवन का मूल आधार है। ध्यान साधना का किसी विशेष धर्म या संप्रदाय से कोई संबंध नहीं है, अपितु इसका संबंध मानव मन की उपयोगिता से है। ध्यान साधना हमारे स्थूल, सूक्ष्म एवं कारण तीनों स्तर पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।
वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार नित्य निरंतर ध्यान साधना करने वाला व्यक्ति एक साधारण व्यक्ति की तुलना में शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक तौर पर अधिक सशक्त व स्वस्थ रहता है। विज्ञान ने तथ्य सहित इस बात को प्रमाणित किया है कि व्यक्ति जो निरंतर ध्यान साधना करता है उसके शरीर से निरंतर कुछ ऐसी ही विद्युत तरंगें प्रवाहित होती हैं।
ध्यान साधना मानव शरीर में समाहित उन अदृश्य शक्तियों को जागृत करती है जिससे वह संपूर्ण सृष्टि को अपने वश में कर सकता है। ध्यान साधना ही मानव जीवन की प्रत्येक समस्या का समाधान है। विश्व में शांति तभी संभव है जब प्रत्येक मानव के जीवन में आध्यात्मिक क्रांति आए और यह केवल ब्रह्मज्ञान के द्वारा ही संभव हो सकती है।