संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति आश्रम संस्थान में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में साध्वी अनुपमा भारती ने श्रद्धालुओं को जीवन में सेवा और समर्पण का महत्व समझाया।
उन्होंने कहा कि बिना सेवा और समर्पण से भक्ति उस दिखावटी पुष्प की भांति है, जो देखने में सुंदर हो सकता है, परंतु वह अपने आसपास के वातावरण को सुवासित नहीं कर सकता। जब एक शिष्य गुरु आज्ञा में निरंतर चलते हुए भक्ति पथ पर आगे बढ़ता है, तब गुरु उस शिष्य की सेवा और समर्पण को आधार बनाकर ही उस पर अपनी असीम दिव्य कृपा की वर्षा करते हैं।
उन्होंने बताया कि सेवा और समर्पण आत्मा की शुद्धि और जीवन के उत्थान का एक सशक्त माध्यम हैं। जब साधक अपने गुरु के प्रति निःस्वार्थ भाव से सेवा करता है, तो उसके भीतर अहंकार का क्षय होता है और विनम्रता का उदय होता है। यही भाव उसे आध्यात्मिक ऊंचाइयों की ओर अग्रसर करता है।
साध्वी ने बताया कि गुरु शिष्य के पूर्व जन्मों के करम संस्कारों को काटकर उसे जन्म और मृत्यु के चक्रव्यूह से मुक्त करने वाले मुक्ति प्रदाता भी होते हैं। गुरु अपने शिष्य का योग क्षेम वहन करते हैं। गुरु के प्रति समर्पण का अर्थ है अपने मन, बुद्धि और अहंकार को उनके चरणों में अर्पित कर देना। जब साधक पूर्ण विश्वास और श्रद्धा के साथ गुरु की आज्ञा का पालन करता है, तब उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आने लगते हैं। भजनों एवं ध्यान साधना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।