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Yamuna Nagar News: स्कंदमाता की पूजा कर भक्तों ने मांगीं मुरादें

Wed, 09 Oct 2024 03:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। नवरात्र के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं ने मंगलववार को मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की। जिलेभर के मंदिरों में सुबह शाम संकीर्तन व पूजन हुआ। इस दौरान चौक , गली-मोहल्लों में जय माता की के घोष सुनाई दिए। भक्तों ने स्कंदमाता की पूजा कर संतान की सुख-समृद्धि के अलावा परिवार में सुख-शांति का वरदान मांगा।
बुधवार को मां के षष्ठम रूप कात्यायनी की पूजा की जाएगी है। मां कात्यायनी दुष्ट दलन करने वाली हैं। इनकी पूजा साधक को अभय दान देती है। महादैत्य महिषासुर का मर्दन करने के कारण मां कात्यायनी को महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है। मां का यह स्वरूप बहुत करुणामयी व ममतामयी माना जाता है।
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मान्यता है कि मां ने महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था। कात्यायन की पुत्री होने के कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा है। पंडित एवं ज्योतिषाचार्य रमन शर्मा ने बताया कि मां कात्यायनी का स्वरूप भव्य व अत्यंत चमकीला है। मां कात्यायनी की सवारी सिंह हैं। उनका ऊपर उठा एक दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है। दूसरी दाहिनी भुजा वर मुद्रा में है।
उनके एक बाएं हाथ में तलवार और दूसरे में कमल पुष्प है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिनके विवाह में अड़चनें आती है, उन्हें विधिवत मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए। मां कात्यायनी की स्तुति से आज्ञा चक्र जाग्रति की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। वहीं, मां की साधना से रोग, शोक, संताप और भय से भी मुक्ति मिलती है। शिक्षा क्षेत्र में सफलता के लिए मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए।
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ऐसे करें मां कात्यायनी की पूजा प्रात

पंडित रमन वत्स ने बताया कि सुबह सबसे पहले स्नान करें। मां कात्यायनी की पूजा के लिए पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पर मां कात्यायनी की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल छिड़क कर शुद्धि करें। इसके बाद मां की प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं और पुष्प अर्पित करें। मां को पीले फूलों के साथ कच्ची हल्दी की गांठ चढ़ाना भी उत्तम है। मां कात्यायनी की पूजा में मिष्ठान का भोग लगाया जाता है। मां को मधु अर्थात शहद अधिक प्रिय है। इसलिए मां को भोग में शहद का भोग अवश्य लगाएं। ऐसी मान्यता है कि शहद का भोग लगाने से सुंदर रूप की प्राप्ति होती है।
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