कपालमोचन। मेला में आने वाले हजारों श्रद्धालु कपालमोचन के अलावा सरस्वती उद्गम स्थल आदिबद्री में भी मंदिरों में पूजा अर्चना करने के लिए पहुंच रहे हैं। पहले दो दिनों की अपेक्षा बुधवार को यहां ज्यादा भीड़ रही। आदिबद्री में पहुंचते ही सबसे पहले श्रद्धालु उद्गम स्थल पर पूजा कर रहे हैं। इसके अलावा यहां वहने वाली जल की प्राकृतिक धारा को लौटे में भर कर उसका आचमन कर रहे हैं। काफी श्रद्धालु तो पानी को बोतलों में भर कर अपने साथ भी ले जाते दिखे।
रोडवेज बसों व अपने वाहनों में आ रहे श्रद्धालुओं को काठगढ़ गांव में ही रोका जा रहा है। यहां से श्रद्धालुओं को केवल ऑटो में ही जाने की अनुमति है। ऑटो में बैठ कर श्रद्धालु आदिबद्री में पहुंच रहे हैं। जहां पर वह श्री आदिबद्री मंदिर व श्री केदारनाथ मंदिर में पूजा अर्चना कर रहे हैं। श्रद्धालुओं ने श्रीकेदारनाथ का जल से अभिषेक किया। सोम नदी के रास्ते से होते हुए श्रद्धालु 1800 फीट ऊंची चोटी पर स्थित माता मंत्रा देवी के मंदिर में भी जा रहे हैं। ऊंची चढ़ाई व रास्ता दुर्गम होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं है। माता मंत्रा देवी के दर्शन करने के लिए युवाओं के साथ-साथ बुजुर्ग श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। कपालमोचन से आदिबद्री के लिए रोडवेज की तरफ से करीब 30 बसें लगाई गई हैं। आदिबद्री में श्रद्धालुओं के लिए स्थायी शौचालय बनाए गए हैं, लेकिन कोई सूचना बोर्ड लगा न होने से श्रद्धालु काफी परेशान दिखे। श्रद्धालु शौचालयों के लिए कभी पुलिस तो कभी किसी से पूछते रहे। वहीं श्रद्धालुओं ने नदी में बह कर आए पत्थरों को एक दूसरे के ऊपर रख कर मन्नत मांगी। मान्यता है कि यहां एक दूसरे के ऊपर पत्थर रखने से यदि अपने घर की मन्नत मांगी जाए तो वह पूरी होती है।
-
लोहगढ़ गुरुद्वारा में भी टेका माथा
कपालमोचन से आदिबद्री जाने श्रद्धालु लोहगढ़ स्थित गुरुद्वारा में भी जा रहे हैं। लोहगढ़ सिखों की पहले राजधानी रही है। बाबा बंदा सिंह बहादुर ने इसे बसाया था। प्रदेश सरकार द्वारा लोहगढ़ को विकसित किया जा रहा है। इसके लिए गुरुद्वारा साहिब जाने वाली सड़क व नदी पर पुल को बनाया गया है। इसके अलावा यहां पर म्यूजियम का भी निर्माण किया जाना है।
आदिबद्री में श्रद्धालुओं के लिए लगाया भंडारा
फोटो: 39
कपालमोचन। कपालमोचन मेला में आदिबद्री में माथा टेकने पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए रादौर निवासी शमशेर सिंह ने भंडारे का आयोजन किया है। उन्होंने बताया कि वह करीब 15 साल से मेला के दौरान आदिबद्री में भंडारे का आयोजन कर रहे हैं। दो दिन तक उनकी तरफ से भंडारा दिया जाएगा। इसके बाद रादौर के ही एक अन्य व्यक्ति की ओर से भंडारा लगाया जाएगा। भंडारे में पहले दिन अन्नकूट, सब्जी, पूड़ी व प्रसाद श्रद्धालुओं को दिया गया। जबकि बुधवार को कढ़ी चावल, पेठा, पूड़ी, सब्जी व चावल का भंडारा दिया गया। उनके साथ रिंकू, कुलदीप, दिनेश, राजजेंद्र, रणधीर सिंह समेत अन्य मौजूद रहे।