संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए जिला प्रशासन ने चीनी की जमाखोरी पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन ने जिले के व्यापारियों के लिए पोर्टल पर चीनी की खरीद और बिक्री का रोजाना डाटा अपलोड करना अनिवार्य कर दिया है। व्यापारियों को प्रतिदिन कितनी चीनी खरीदी गई और कितनी बेची गई, इसका पूरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज करना होगा।
इस व्यवस्था से प्रशासन के पास रिकॉर्ड रहेगा कि कितनी चीनी खरीदी गई और कितनी बिक्री हुई। इसके बाद जिले में व्यापारियों के पास चीनी का कितना स्टॉक मौजूद है। दीपावली, भाईदूज सहित अन्य त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे में चीनी की खपत भी कई गुना बढ़ जाती है।
इसे देखते हुए प्रशासन को आशंका है कि कुछ व्यापारी बढ़ती कीमतों के बीच चीनी की जमाखोरी कर सकते हैं। प्रशासन ने इसे रोकने के लिए निगरानी और जांच की व्यवस्था तेज कर दी है। जिला प्रशासन ने सभी व्यापारियों को अपने चीनी के गोदामों की जानकारी सात दिन के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
व्यापारियों को बताना होगा कि उनके पास चीनी का कितना स्टॉक मौजूद है और उसे किस स्थान पर रखा गया है। इसके बाद प्रशासन की ओर से गठित टीमें गोदामों में पहुंचकर स्टॉक का भौतिक सत्यापन करेंगी। जमाखोरी की जांच के लिए जिला प्रशासन ने आठ टीमों का गठन किया है। ये टीमें फील्ड में उतरकर चीनी के स्टॉक की जांच करेंगी। पोर्टल पर दर्ज खरीद-बिक्री और गोदाम में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक का मिलान भी किया जाएगा।
अनियमितता मिलने पर संबंधित व्यापारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि त्योहारी सीजन में मिठाई कारोबार में चीनी की बड़े पैमाने पर खपत होती है। ऐसे में बाजार में चीनी की कमी पैदा कर कीमत बढ़ाने या मुनाफाखोरी करने की किसी भी कोशिश को रोकने के लिए निगरानी जरूरी है। चीनी के लगातार बढ़ते दामों को देखते हुए प्रशासन ने व्यापारियों की गतिविधियों पर नजर बढ़ा दी है।
सभी व्यापारियों को पोर्टल पर चीनी का रिकॉर्ड अपडेट करना होगा। पोर्टल पर जानकारी देनी होगी कि कितनी चीनी खरीदी और कितनी बिक्री हुई। गोदामों का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। जिससे पता चल सकेगा कि कोई चीनी की अवैध जमाखोरी तो नहीं कर रहा। - नितिश सिंगला, डीएफएससी, यमुनानगर।