संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा माडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 50वें दिन महा साध्वी डॉ.स्वाति महाराज ने कहा कि आज पर्यूषण महापर्व की मंगल बेला में सातवां दिन है, और कल संवत्सरी महापर्व है। संवत्सरी पर पौषध का विशेष महत्व होता है इसलिए सभी ने पौषध व्रत अवश्य करना है। आज की वाचना में साध्वी ने तेरह महारानियों की अद्भुत साधना का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि यह तेरह रानियां राजगृह नगरी के राजा श्रेणिक की महारानियां थी। इन्होंने अपने जीवन में दुख का कभी भी अनुभव नहीं किया था, लेकिन जब प्रभु महावीर की वाणी सुनी तो मन में वैराग्य उत्पन्न हो गया और इन्होंने संयम पथ अपनाने का मन बना लिया।
उन्होंने बताया कि राजा श्रेणिक व पारिवारिक जनों ने उनको बहुत समझाया कि संयम का रास्ता बहुत कठोर है लेकिन उन्होंने किसी भी कष्ट की परवाह नहीं की। अपने मन को समझाया और दीक्षा का कठिन पथ अपना लिया। इन महान नारियों ने शेरनी की तरह संयम से काम दिया और शेरनी की तरह संयम पथ को निभाया। कठोर से कठोर तपस्या व साधनाएं की। इस अंत:गढ़ सूत्र में 90 महापुरुषों की महान जीवन गाथाएं हैं जिन्हें सुनकर हमारा मन भी साधना के लिए तैयार होता है।
महा साध्वी ने समस्त जैन समाज को पर्यूषण महापर्व के दौरान की गई तपस्या के लिए साधुवाद दिया और आने वाले कल यानी संवत्सरी के दिन अधिक से अधिक तप, तपस्या और संयम रखने की और पौषध व्रत का पालन करने की प्रेरणा दी बदले में सभी श्रावकों ने अपनी सहमति से अधिक से अधिक तपस्या और पौषध करने का प्रण किया।