ट्विनसिटी से करीब 700 डेयरियों को शहर से बाहर करने की कवायद पिछले 12 वर्ष से चल रही है। इसके लिए यमुनानगर और जगाधरी में पांच स्थानों पर करोड़ों की लागत से डेयरी कांप्लेक्स बनाए गए।
इनमें डेयरियों को शिफ्ट करने को प्लाट भी आवंटित हुए, किंतु अब भी डेयरियां शहर से बाहर नहीं हो पाईं। नहर निगम बनने के पांच वर्ष बाद भी शहर में सैकड़ों डेयरियां चल रही हैं, जबकि शहरवासियों को निगम से डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट के पूरा होने की आस थी। डेयरी कांप्लेक्स निगम की सीमा में आने पर कई हाउस मीटिंगों में यह प्रस्ताव रखा जा चुका है। वार्ड पार्षदों की मानें तो प्रशासन हर बार टाइम बाउंड कर कार्रवाई की बात करता है, किंतु आगे कुछ नहीं हो पाता है।
बता दें कि शहर में चल रही डेयरियां गंदगी के साथ निकासी में भी रोड़ा बन रही हैं। डेयरियों में व उनके आसपास गोबर को जमा किया जाता है, जिससे लोगों को बदबू के साथ मक्खी-मच्छर की दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता है। कई जगह डेयरियों से निकलने वाला गोबर व अन्य गंदगी को नालियों व नालों और सीवरेज में छोड़ दिया जाता है, जिससे क्षेत्र में पानी निकासी की व्यवस्था चोपट हो जाती है। दो दशक से इस समस्या से त्रस्त शहरवासी डेयरियों को
करीब 700 डेयरियों को शहर से बाहर करने को कवायद शुरू हुई। इसके तहत यमुनानगर-जगाधरी में चार स्थानों पर करोड़ों रुपये की लागत से डेयरी कांप्लेक्स बनाए गए। इसके बाद प्लाट आवंटन की की प्रक्रिया भी हुई, लेकिन इसके बाद योजना धरी रह गई। इस प्रोजेक्ट के सिरे न चढ़ पाने के लिए नगर निगम और डेयरी संचालक एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराते आए। नगर निगम बनने के बाद शहरवासियों को अधर में लटके प्रोजेक्ट के पूरे होने की आस थी, किंतु निगम बनने के पांच वर्ष बाद भी डेयरियां शहर से बाहर न हो पाईं। वार्ड पार्षद कई हाउस मीटिंगों में इस प्रस्ताव को रख चुके हैं, बावजूद इसके शहर में सैकड़ों डेयरियां चल रही हैं।
यमुनानगर में दड़वा, रायपुर, औरंगाबाद व जगाधरी में कैल गांव में 2001 में डेयरी कांपलेक्स बनाने का काम शुरू हुआ। इनमें दड़वा में सबसे अधिक राशि खर्च की गई। इसमें 77 लाख 75 हजार 902 रुपये से 20 एकड़ सात कनाल 12 मरला जमीन खरीदी गई। जबकि सड़कों, बिजली, नालियों, स्ट्रीट लाइट आदि पर करीब 89 लाख 57 हजार 774 रुपये खर्च किए गए थे। यहां कुल 241 प्लाट काटे गए, जिनमें 2011 तक 237 आवंटित हो गए। इसी तरह रायपुर में डेयरी कांपलेक्स बनाने के लिए 56 लाख 52 हजार 988 रुपये से कुल नौ एकड़ पांच कनाल 11 मरला जमीन खरीदी गई। जबकि सड़कों, बिजली, नालियों, स्ट्रीट लाइट आदि कार्यों पर 51 लाख 65 हजार 413 रुपये खर्च किए गए थे। यहां 115 प्लाट काटे गए, जिनमें 2011 तक 105 आवंटित हो गए।
औरंगाबाद में भी करीब 58 लाख 84 हजार 505 रुपये से नौ एकड़ दो कनाल जमीन खरीद गई वहीं, विकास कार्यों पर 42 लाख 54 हजार 776 रुपये खर्च किए गए थे। यहां 109 प्लाट काटे गए, जिनमें 2011 तक 80 आवंटित हो गए। जबकि कैल में करीब 50 लाख रुपये 12 एकड़ 19 मरले जमीन खरीदी गई वहीं, करीब 50 लाख विकास कार्यों पर खर्च हुए। यहां 177 प्लॉट काटे गए, जिसमें से कुछ समय बाद कांप्लेक्स की दो एकड़ जमीन दादूपुर-नलवी नहर परियोजना में अधिगृहित किए जाने से 157 प्लाट रह गए।