डेंगू बीमारी की रोकथाम के लिए फॉगिंग नहीं कराने पर नगर निगम, नगरपालिका व बीडीपीओ कार्यालय के अधिकारी अब खुद जिम्मेदार होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि यह तीनों विभाग अब अपने स्तर पर फॉगिंग के लिए दवा की खरीद करेंगे। फॉगिंग की दवा के लिए नगर निगम व ग्राम पंचायतों की जिला मलेरिया विभाग पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। खुद दवा खरीदने से अधिकारियों की यह बहानेबाजी भी खत्म हो जाएगी कि उन्हें मलेरिया विभाग से फॉगिंग के लिए दवा नहीं मिल रही। वहीं सोमवार को भी डेंगू के चार नए केस मिले। इनमें गांव बाकरवाला से 35 वर्षीय महिला, जगाधरी में 47 वर्षीय व्यक्ति, कांसापुर में 69 वर्षीय महिला, हमीदा का 15 वर्षीय किशोर शामिल है। वहीं गांव हैबतपुर में 26 साल की युवती, कैंप में 53 साल की महिला, हमीदा में 41 साल की महिला, अरनौली में 12 साल की किशोरी व 23 साल की युवती शामिल है। जिले में चिकनगुनिया के अब तक 64 केस मिल चुके हैं।
मानसून सीजन के दौरान हर साल जिला मलेरिया विभाग को स्वास्थ्य विभाग की तरफ फॉगिंग के लिए दवा दी जाती है। जो भी विभाग जैसे नगर निगम, नगरपालिका या ग्राम पंचायत अपने वार्ड या गांव में फॉगिंग कराना चाहता है तो वह मलेरिया विभाग से दवा लेता है। मलेरिया विभाग की तरफ से यह दवा निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। परंतु ज्यादातर ग्राम पंचायतें व नगर निगम के अधिकारी फॉगिंग के लिए विभाग से दवा लेते ही नहीं हैं। यदि दवा ले ली तो उससे फॉगिंग नहीं कराई जाती। जब लोग अधिकारियों से अपने वार्ड या गांव में फाॅगिंग कराने के लिए कहते हैं तो उनका रटा सा जवाब होता है कि उन्हें मलेरिया विभाग से अभी दवा नहीं मिली है। लोगों को डेंगू व चिकनगुनिया अपनी चपेट में लेता रहता है और अधिकारी बहाने बनाते रहते हैं।
डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया पर समय रहते काबू पाया जा सके इसके लिए कुछ साल पहले सभी ग्राम पंचायतों व नगर निगम में फॉगिंग मशीनें खरीदी गई थी। इस वक्त 439 गांवों के पास अपनी फॉगिंग मशीन है। इसके अलावा नगर निगम के पास 14 मशीनें छोटी व दो बड़ी मशीन हैं। बड़ी मशीनों को गाड़ी में रख कर वार्ड में ले जाकर इनसे फॉगिंग की जाती हैं।
जिले में डेंगू के अब तक 122 केस मिल चुके हैं। इस बार डेंगू तेजी से फैल रहा है। यही वजह है कि इतने कम समय में डेंगू के बहुत ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। जबकि गत वर्ष पूरे साल में 932 केस डेंगू के मिले थे।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुशीला सैनी ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री, विभाग के एसीएस व महानिदेशक के साथ हुई बैठक में नगर निगम व बीडीपीओ को खुद ही दवा खरीदने के लिए कहा गया है। ताकि वह अपनी जरूरत के हिसाब से दवा खरीद कर फॉगिंग करवा सकें। अभी तक मलेरिया विभाग ही फाॅगिंग के लिए दवा उपलब्ध करवाता था।