संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। दांतों की बीमारियों के उपचार में तकनीक का नया दौर शुरू हो चुका है। अब लेजर और रोबोटिक तकनीक की मदद से कई जटिल दंत रोगों का इलाज बिना अधिक दर्द और बिना चीर-फाड़ के संभव हो सकेगा। यह जानकारी डीएवी डेंटल कॉलेज, यमुनानगर में इंडियन सोसाइटी ऑफ पेरियोडोंटोलॉजी एंड इम्प्लांटोलॉजी की ओर से आयोजित तीन दिवसीय समीक्षा कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को दी।
पीजीआई चंडीगढ़ की यूनिट हेड डॉ. शिप्रा गुप्ता ने बताया कि आधुनिक लेजर तकनीक से मसूड़ों और दांतों की कई सर्जरी बिना टांके और कम रक्तस्राव के साथ की जा सकती हैं। इससे मरीजों को कम दर्द होता है और रिकवरी भी पहले की तुलना में काफी तेज होती है।
आईजीटी गुरुग्राम से डॉ. अमित भारद्वाज ने कहा कि रोबोटिक तकनीक उपचार प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाकर सफलता की संभावनाओं को बढ़ा रही है। भारतीय शोध अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। पहले देश में होने वाले कई शोध सीमित दायरे में रह जाते थे, लेकिन अब उनके परिणाम प्रकाशित होने से पूरी दुनिया लाभान्वित हो रही है।
कार्यक्रम के दौरान पोस्टग्रेजुएट विद्यार्थियों को जेनेटिक्स और पेरियोडोंटल रोगों, पेरियोडोंटल सर्जरी, आधुनिक उपकरणों के उपयोग तथा व्यावहारिक चिकित्सा तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। स्टेप-बाय-स्टेप वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से जटिल प्रक्रियाओं को सरल तरीके से समझाया जा रहा है। पेरियोडोंटोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ. निफिया पंडित ने पेरियोडोंटल प्लास्टिक एवं एस्थेटिक सर्जरी, डॉ. विशाखा ग्रोवर ने एविडेंस-बेस्ड डेंटिस्ट्री, डॉ. डीएस कलसी ने पेरियोडोंटोलॉजी के विभिन्न आयामों तथा डॉ. शिखा तिवारी ने रिस्क फैक्टर्स पर व्याख्यान दिए।
वहीं डॉ. राजन गुप्ता और डॉ. गुरप्रकाश सिंह चहल ने पेरियोडोंटल संक्रमण और समग्र स्वास्थ्य के संबंध पर प्रकाश डाला। प्राचार्या डॉ. आईके पंडित ने बताया कि हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश सहित नेपाल से आए करीब 85 विद्यार्थी इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।