यमुनानगर। डेंगू के मरीजों को सिविल अस्पताल में प्लेटलेट्स मुफ्त चढ़ाए जाएंगे। इसके लिए जरूरी है कि डेंगू से प्रभावित मरीज किसी भी सिविल अस्पताल में भर्ती हो। इतना ही नहीं उसके पास हरियाणा का स्थायी निवास पत्र भी होना जरूरी है। डेंगू के केस बढ़ने पर अक्सर मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स घटने लगते हैं। इसलिए डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच प्लेटलेट्स की मांग काफी बढ़ जाती है। प्राइवेट अस्पताल में ही एसडीपी यानी सिंगल डोनर प्लेटलेट्स चढ़ाने के कम से कम 11 हजार रुपये लिए जाते हैं। इसके अलावा अस्पताल अन्य खर्च अलग से जोड़कर मरीज के तीमारदारों की जेबें खाली हो जाती हैं।
आमतौर पर शरीर में यदि प्लेटलेट्स एक लाख से भी कम हो जाएं तो मरीज व उसके परिजन घबरा जाते हैं। इसके लिए वह एक के बाद एक कई अस्पताल बदल लेते हैं। जबकि प्लेटलेट्स यदि 20 हजार पर पहुंच जाएं तभी यह घातक साबित सिद्ध होते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यदि शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या 20 हजार हो जाए तो मरीज को अलर्ट हो जाना चाहिए। यदि प्लेटलेट्स इससे भी कम हो रहे हैं और मरीज की नाक व शौच के दौरान खून आ रहा है तो उपचार में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। 10 हजार से कम प्लेटलेट्स की संख्या जानलेवा साबित हो सकता है।
कंट्रोल रूम से ले सकते हैं डेंगू की जानकारी
जिले में पहली बार डेंगू बीमारी को लेकर कंट्रोल रूम बनाया गया है। कंट्रोल रूम के लैंडलाइन नंबर 01732-319030 पर फोन करके कोई भी व्यक्ति डेंगू बीमारी के लक्षण, रोकथाम, उपचार संबंधित जानकारी ले सकता है।
सिविल अस्पताल में प्लेटलेट्स मुफ्त चढ़ाए जाएंगे। डॉक्टर यह जांच करेगा कि मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत है या नहीं। इसके लिए मरीज का सिविल अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है। साथ में वह हरियाणा का निवासी होना चाहिए। जिले में डेंगू के 72 केस हो गए हैं।
-डॉ. सुशीला सैनी, जिला मलेरिया अधिकारी, यमुनानगर।