संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सरकारी स्कूल में सीबीएसई पैटर्न की शिक्षा देने के लिए सरकार ने प्रदेश के करीब एक हजार स्कूलों को संस्कृति मॉडल स्कूल बना दिए हैं, लेकिन इन स्कूलों में विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। इसके विरोध में सोमवार को कैंप स्थित सरकारी स्कूल के बाहर अभिभावकों ने प्रदर्शन किया।
अभिभावकों ने टेंट लगाकर स्कूल के बाहर नारेेबाजी की। अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन पर गरीब बच्चों को प्रवेश न देने और फीस की मांग को लेकर रोष जताया। हालांकि सोमवार को स्कूल बंद रहा, लेकिन अभिभावक वहां धरने पर बैठे रहे। सूचना मिलते ही थाना गांधीनगर प्रभारी पुलिस बल के साथ पहुंच गए। उन्होंने लोगों को कोरोना की दुहाई देते हुए प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की। काफी समझाने के बाद अभिभावक घर जाने को राजी हुए। परंतु अभिभावकों ने कहा कि यदि स्कूल प्रशासन उनकी बात नहीं सुनेगा तो शिक्षामंत्री कार्यालय, शिक्षामंत्री आवास से लेकर मुख्यमंत्री तक जाएंगे।
प्रदर्शन में कैंप की एक दर्जन कालोनियों के अलावा अन्य क्षेत्र के लोग भी पहुंचे थे। अभिभावकों ने आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल में सीबीएसई माध्यम से पढ़ाई के कारण गरीब बच्चों को दाखिला नहीं मिल पा रहा है। सिफारिश पर निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दाखिला दिया जा रहा है। दशमेश कालोनी की विनिता ने बताया कि वह कई बार स्कूल आ चुकी है। उसने अपने दोनों बच्चों का इंग्लिश मीडियम में दाखिला करना है, लेकिन इसके लिए स्कूल की ओर से पांच पांच सौ रुपये फीस मांगी जा रही है। कैंप के बिट्टू ने कहा कि वह अपनी भतीजी को अंग्रेजी माध्यम में दाखिल करवाने के लिए एक सप्ताह से चक्कर काट रहा है। स्कूल किसी न किसी बहाने टाल रहा है। अब कहा जा रहा है कि सीट भर गई हैं।
जम्मू कालोनी के नीरज जैन व इंद्रजीत ने बताया कि किराए पर रहते हैं। दोनों को चार बच्चों का कैंप के स्कूल में दाखिले करना है। जिसके लिए कई दिन चक्कर कट रहे हैं। परंतु अब स्टाफ ने सीटें पूरी भर जाने की बात कहकर चलता कर दिया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि इंग्लिश मीडियम की कक्षाओं में सिफारिशों पर दाखिले दिए जा रहे हैं और उनके बच्चों को दाखिले से वंचित रखा जा रहा है।
स्कूल विद्यार्थियों ने भी जताया रोष
प्रदर्शन में अभिभावकों के साथ इस स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी पहुंचे और धरने पर बैठे रहे। यहां उन्होंने कहा कि सरकार ने अंग्रेजी माध्यम बना तो दिया है, लेकिन व्यवस्था नहीं बनाई। पहले जो विद्यार्थी निजी स्कूल में फीस देकर पढ़ रहे थे, उन्हें दाखिला दे दिया गया है। पिछले साल इसी स्कूल से हिंदी माध्यम की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को दाखिला नहीं दिया गया है।
अंग्रेजी माध्यम में विभाग के तय नियमों के आधार पर ही किए गए हैं। जिन कक्षाओं में सीट से ज्यादा रजिस्ट्रेशन थे, वहां कमेटी के सामने वीडियोग्राफी कर ड्रॉ निकाला गया है। ड्रा के माध्यम से पात्रों को सीट दी गई है। हिंदी माध्यम की दाखिला प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। एक मई के बाद से प्रदेश बोर्ड के लिए दाखिले किए जाएंगे। उषा नेगी, प्रिंसिपल, सरकारी स्कूल कैंप।