संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर में वाणिज्यिक गैस सिलिंडरों की बढ़ती कीमतों के बाद घरेलू गैस (एलपीजी) की मांग बढ़ गई है। 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक सिलिंडर की कीमत 3100 रुपये से अधिक पहुंचने के बाद अब दुकानदार और रेहड़ी संचालक घरेलू गैस सिलिंडरों का इस्तेमाल करने लगे हैं। खासकर फास्ट फूड की रेहड़ियों और छोटी दुकानों पर घरेलू सिलिंडरों का उपयोग किया जा रहा है।
व्यावसायिक गतिविधियों के लिए घरेलू सिलिंडर का इस्तेमाल नियमों के खिलाफ है, लेकिन महंगे वाणिज्यिक सिलिंडरों से बचने के लिए लोग घरेलू गैस को 19 किलो के सिलिंडरों में ट्रांसफर कर काम चला रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इसे पलटी मारना कहा जाता है। गैस की अदला-बदली का यह काम अधिकतर घरों के भीतर ही किया जा रहा है।
यदि अधिकारी जांच के लिए पहुंचते भी तो मौके पर वाणिज्यिक सिलिंडर दिखाई देने पर कार्रवाई से बचने की कोशिश की जाती है। इसके लिए बाजार में मात्र 50 रुपये में मिलने वाला एक छोटा उपकरण इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे स्थानीय भाषा में बांसुरी कहा जाता है। यह उपकरण किसी भी गैस चूल्हा या गैस उपकरण की दुकान पर आसानी से उपलब्ध है।
गैस एजेंसियों से जुड़े लोगों का कहना है कि वाणिज्यिक सिलिंडरों की मांग में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। जिले में वाणिज्यिक गैस कनेक्शनों की संख्या 1709 से अधिक है, लेकिन इसके बावजूद रोजाना केवल 100 से 113 सिलिंडरों की ही मांग आ रही है। इससे साफ है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता घरेलू गैस सिलिंडरों का उपयोग व्यावसायिक कार्यों में कर रहे हैं।
गैस की अल्टा-पल्टी से हादसे का खतरा
पिछले दिनों भेरथल-सलेमपुर रोड पर एक सिलिंडर से दूसरे में गैस पलटते समय ही धमाका हुआ था,जिसमें 11 लोग झुलस गए थे। बाद में इनमें से पांच लोगों की मौत हो गई। काफी लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने दिखावे के लिए सामने तो वाणिज्यिक सिलिंडर रखा है। लेकिन साथ में घरेलू सिलिंडर भी रखा हुआ है। उसी पर सारा काम हो रहा है। लगातार बढ़ती गैस कीमतों के कारण छोटे दुकानदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। ऐसे में कई लोग घरेलू सिलिंडरों का सहारा ले रहे हैं।
घरेलू गैस सिलिंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है। नियमित रूप से चेकिंग की जा रही है। वाणिज्यिक सिलिंडरों की कोई कमी नहीं है। लोग एजेंसी से प्राप्त कर सकते हैं। - राकेश बिंदल, कार्यालय अधीक्षक, डीएफएससी।