जगाधरी। किसान आंदोलन के चलते दिल्ली में प्रवेश की सभी सीमाएं सील कर दी हैं। आवाजाही ठप होने का असर बर्तन उत्पादन नगरी में जगाधरी की ईकाइयों पर देखने को मिल रहा है। दिल्ली सीमा बंद होने से जगाधरी की ईकाइयों में तैयार 80 प्रतिशत माल यही पड़ा हुआ है। तीन दिन से तैयार माल की आपूर्ति नहीं होने से व्यापारी भी परेशान हैं। बर्तन नगरी के 200 ट्रकों का माल अधर में लटका हुआ है। जिससे अभी तक करीब 250 से 300 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। वहीं कच्चे माल की आपूर्ति न होने से उत्पादन में कमी आई है, जिससे उद्यमियों को दोहरी पड़ रही है।
जानकारी के अनुसार जगाधरी की फैक्ट्रियों में तैयार माल देश के करीब सभी राज्यों में भेजा जाता है। दिल्ली में बर्तन का बड़ा बाजार है। जगाधरी की फैक्ट्रियों में तैयार माल पहले दिल्ली और फिर वहां से पूरे देश में भेजा जाता है। दिल्ली माल न पहुंच पाने के कारण लगभग देशभर में बर्तन की सप्लाई में कमी आई है। दिल्ली बॉर्डर सील होने से जगाधरी में तैयार करोड़ों का बर्तन फैक्ट्रियों में ही पड़ा है। दो दिन से ट्रांसपोर्ट से दिल्ली के लिए बर्तन के ट्रक नहीं भेजे जा रहे हैं। जो ट्रक दो दिन पहले भेजे गए थे, वे भी रास्ते में ही फंसे खड़े हैं। दूसरी तरफ दिल्ली से कच्चा माल भी नहीं जगाधरी पहुंच रहा है। जिससे ईकाइयों में बर्तन उत्पादन की गति काफी कम हो गई है। संवाद
करोड़ों का माल गोदाम में पड़ा
बर्तन उद्योगपति अनिल अरोड़ा ने बताया कि जगाधरी में हर तरह का बर्तन बनाया जाता है। जिनकी आपूर्ति पूरे देश में होती है। इसके लिए पहले जगाधरी से दिल्ली माल भेजा जाता है और फिर वहां से राजस्थान, गुजरात, मुंबई, गोवा, दक्षिण भारत सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में भेजा जाता है। दिल्ली बॉर्डर बंद होने से माल नहीं पहुंच रहा है। तैयार माल गोदामों व ट्रांसपोर्ट पर पड़ा है। वहीं दिल्ली से कच्चा माल नहीं आ रहा है, जिससे उत्पादन में भी कमी आई है। जबकि तैयार माल न जाने के कारण भी उत्पादन में कमी आई है। चूंकि गोदाम व ट्रांसपोर्ट पर माल रखने की जगह नहीं है। इससे अब तक करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
उद्यमियों को हो रहा नुकसान
दी जगाधरी मेटल मैन्युफैक्चरर्स एंड सप्लायर्स एसोसिएशन के महासचिव सुंदरलाल बतरा ने बताया दिल्ली बॉर्डर बंद होने से बर्तन व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। इससे जहां तैयार माल की सप्लाई नहीं हो पा रही है, वहीं उत्पादन के लिए कच्चा माल भी नहीं मिल रहा है। शादियाें का सीजन चल रहा है, इन दिनों बर्तन की मांग अधिक होती है। पहले चालकों की हड़ताल के कारण इंडस्ट्री को भारी नुकसान हुआ था। वहीं अब दिल्ली माल न भेज पाने के कारण करीब 300 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। बर्तन उद्योग पहले ही मंदी की मार झेल रहा है, वहीं इससे उद्यमियों व व्यापारियों की दिक्कत काफी बढ़ गई है। उनकी जानकारी के अनुसार हालात ऐसे हैं कि दो दिन स्थिति सामान्य होने में लगेंगे। जिसके बाद सप्लाई शुरू हो पाएगी।