संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी पिता रंजीत थापा के साथ बचपन में घर पर ही गेंद पर मारने वाला दीपांशु अब खेल में जिले का नाम चमका रहा है। दस वर्ष की उम्र में पिता के साथ मस्ती के लिए खेलता था। इस दौरान पिता उसे फुटबॉल पर पैर चलाने के गुर सिखाने लगे और तभी से फुटबॉल को दीपांशु ने अपना लक्ष्य बना लिया।
दीपांशु फुटबॉल में कई पदक जीतकर जिले का नाम रोशन कर चुका है। 12वीं के छात्र शहर की बैंक कॉलोनी के रहने वाले दीपांशु थापा दस वर्ष की उम्र से फुटबॉल खेलना शुरू किया था। तीन साल वह केवल फुटबॉल पर पैर चलता था और इसके बाद उसने पिता की तरह नाम कमाने की ठानी। दीपांशु ने बताया कि इसके बाद उसने फुटबॉल का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। अकादमी में अभ्यास के दौरान टीम में उसका चयन हुआ। अकादमी स्तर पर कई मैच हुए और इसमें आठ पदक प्राप्त किए। इसके बाद जिलास्तर की टीम में खेलना शुरू किया।
जिलास्तर पर होने वाले कई मैच में भाग लेकर अपना खेल और बेहतर किया। दीपांशु ने बताया कि 2022 के अंत में वह अंबाला की वॉर हीरोज फुटबॉल एकेडमी चला गया। यहां पर बड़े स्तर पर खेलना शुरू किया। अंबाला में कई राज्यों के खिलाड़ी थे, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके थे। उनका खेल देखकर उनसे इसके गुर सीखे। इसके बाद अंबाला की जिला टीम में जगह मिली। यहां एक साल अंबाला में कड़ा अभ्यास किया और कई मैच खेले। घर लौटने पर उसका चयन जिला फुटबॉल टीम में हो गया। यहां से वह जिलास्तर पर खेला।
वर्ष 2024 पौढ़ी गढ़वाल पंचायती टूर्नामेंट में खेले और यहां पर मैन ऑफ द मैच रहे। इसके बाद 2025 में सीनियर स्टेट चैंपियनशिप में जिले की ओर से मैच खेले। वहीं, गत वर्ष हुई अंडर-19 जोनल फुटबॉल में जिला टीम की ओर से खेले और इसमें उपविजेता बने।
दीपांशु ने बताया कि उसका सपना पिता रंजीत थापा की तरह भारतीय फुटबॉल टीम में देश के लिए खेलना है। अपने इसी लक्ष्य को लेकर वह लगातार अभ्यास कर रहा है।