संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के 15वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने प्रवचन करते हुए संगत से कहा कि तन से सेवा कीजिए। मन से भले विचार। धन से इस संसार में करिए परोपकार। आपको शुभ कर्मों से स्वस्थ निरोग शरीर प्राप्त हुआ है तो इससे दीन-दुखियों की सेवा करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आपको मन मिला है तो मन से सभी के मंगल की कामना करनी चाहिए। सुबह उठकर यह कामना करनी चाहिए कि प्रभु सभी जीव सुखी हों, सभी स्वस्थ व निरोगी रहें। सभी का मंगल हो, कल्याण हो। आपको धन मिला तो धन से गरीबों की सहायता करनी चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति की हर जरूरत पूरी करनी चाहिए। उधर मन से संचित किए धन को सेवा में लगा देना चाहिए।
दान देने से धन घटता नहीं है, बढ़ता है। क्योंकि जो दे दिया जाता है, वह परलोक के बैंक में सुरक्षित हो जाता है और जो संचित करके रखा जाता है, वो मरने के बाद यहीं रह जाता है। दान की महता कई प्रकार की होती है। दान करने से जीवन में सुख-शांति आती है। दान करने से मन में दया व करुणा की भावना जागृत होती है।
यह दूसरों के प्रति सहानुभूति व सहयोग की भावना रखने में मदद करता है। दान करने से आत्मविश्वास व आत्मसम्मान बढ़ता है। साथ ही जीवन में एक सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद करता है। दान भी कई प्रकार का होता है, जैसे कि धन दान, समय दान, ज्ञान दान, श्रम दान। दान करने से न केवल दूसरों की मदद कर सकते हैं बल्कि अपने जीवन को भी सार्थक व संतुलित बना सकते हैं।