यमुनानगर। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में शनिवार को महिला की नॉर्मल डिलीवरी के चार घंटे बाद उसकी बच्ची की मौत हो गई। जन्म के बाद से ही बच्ची का रंग नीला पड़ने लगा था। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा कर दिया। उनका आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ की लापरवाही से ही बच्ची की मौत हुई है। तीन घंटे तक स्टाफ और डॉक्टर कोई भी बच्ची को देखने नहीं आया। स्टाफ अपने कान में मोबाइल की ईयर फोन लगाकर वीडियो देखते रहे। मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को शांत कराया।
विजय कॉलोनी निवासी दीनानाथ ने बताया कि वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का रहने वाला है। वह यमुनानगर में काम करता है इसलिए विजय कॉलोनी में पत्नी निशा के साथ रहता है। उसकी पत्नी निशा के पास पहले एक लड़की है। अब उसकी पत्नी दूसरी बार गर्भवती हुई थी। उसका उपचार मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल से चल रहा था। डॉक्टरों ने नियमित चेकअप में निशा व उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को नॉर्मल बताया था। शनिवार तड़के निशा को प्रसव पीड़ा होने लगी। जिसके बाद वह तड़के चार बजे निशा को जिला नागरिक अस्पताल में लेकर आया। अस्पताल के स्टाफ ने निशा को अस्पताल में भर्ती कर लिया और जल्द ही डिलीवरी होने की बात कही। नॉर्मल डिलीवरी से निशा ने सुबह 6.40 बजे एक बच्ची को जन्म दिया। तब बच्ची का रंग हल्का नीला था। उन्होंने समझा की शायद जन्म के दौरान बच्चों का रंग ऐसा ही होता होगा।
दीनानाथ का आरोप है कि सुबह से लेकर साढ़े नौ बजे तक अस्पताल का डॉक्टर या स्टाफ कोई भी वार्ड में बच्ची व उसकी पत्नी को देखने के लिए नहीं आया। जिससे बच्ची का रंग पहले से ज्यादा नीला होता जा रहा था। वह स्टाफ नर्स के पास भी गया, लेकिन वह मोबाइल में वीडियो देखने में व्यस्त रहीं। करीब साढ़े नौ बजे एक नर्स देखने के लिए आई तो वह कहने लगी कि बच्ची को निक्कू वार्ड में लेकर चले जाएं। जहां डॉक्टर ने उसे वार्ड में भर्ती कर लिया। थोड़ी देर के बाद ही बच्ची ने दम तोड़ दिया। उनका कहना है कि जन्म के दौरान बच्ची को ठीक से साफ भी नहीं किया गया था। इस पर दीनानाथ ने फोन करके डायल 112 पुलिस को मौके पर बुला लिया। सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी। यदि स्टाफ की गलती मिली तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई करवाने से मना कर दिया: सतपाल सिंह
डायल 112 से पहुंचे सतपाल सिंह सूचना मिलते ही वह जिला अस्पताल में पहुंच गए थे। परंतु मृतक बच्ची के परिजनों ने कोई भी कार्रवाई करवाने से मना कर दिया।
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कमेटी बनाकर जांच कराएंगे : मंजीत सिंह
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स्टाफ पर पहले भी लग चुके हैं लापरवाही के आरोप
जिला नागरिक अस्पताल में स्टाफ पर पहली बार आरोप नहीं लग रहे हैं। इससे पहले महिला व बच्चों की मौत के मामले अस्पताल में हो चुके हैं। इसी साल 25 मई को पलौड़ी गांव निवासी रणजीत जब अपनी पत्नी को डिलीवरी के लिए जिला नागरिक अस्पताल में लेकर आया था। रणजीत ने आरोप लगाया था कि अस्पताल का स्टाफ उसकी पत्नी को देखने के लिए नहीं आया। जिससे बच्चे का सिर बाहर आ गया। दम घुटने से बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बाद लेबर रूम में डिलीवरी के दौरान एक महिला की मौत हो गई थी। तब भी परिजनों ने आरोप लगाया था कि डॉक्टर ने उपचार में लापरवाही बरती। जबकि उसकी पत्नी को कोई दिक्कत नहीं थी।