संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। लोकसभा चुनाव के बीच निवर्तमान विपक्षी पार्षद स्ट्रीट लाइट मुद्दे पर सरकार और अफसरों को सवालों में घेर रहे हैं। उनका आरोप है कि गत पांच वर्षों में नगर निगम यमुनानगर जगाधरी क्षेत्र के अधिकांश वार्डों में लाइट व्यवस्था बिगड़ी रही। हालात ये हैं कि अब चुनावी सीजन के बीच भी गलियों-सड़कों में स्ट्रीट लाइट न होने या खराब होने से अंधेरा छाया है।
मार्च-2020 में नगर निगम ने वार्ड-2, 6, 8, 9, 10, 15, 19 व 21 में एलईडी लाइटें लगाने का करीब चार करोड़ रुपये का टेंडर हुआ था। इससे उक्त आठ वार्डों में सितंबर-2021 तक 8164 एलईडी लाइटें लग पाईं। अन्य 14 वार्डों में नाममात्र एलईडी लाइटें लगीं। जिन आठ वार्डों में लगीं, वहां भी कई बंद व खराब हो रही हैं। निवर्तमान पार्षद नई एलईडी लाइटें न लगने व पुरानी लाइटों की मरम्मत न होने का मुद्दा हर सदन बैठक उठा चुके हैं।
आरोप है कि कार्यकाल रहते हालात नहीं सुधर पाए। इससे वार्डों के गांवों से लेकर कॉलोनियों व मोहल्लों में शाम बाद अंधेरा रहता है। ये परेशानी दूर करने को यूएलबी (अर्बन लोकल बॉडी) से सवा साल पहले 41011 नई स्मार्ट एलईडी लाइटें मंजूर हुई, पर अभी तक यह वार्डों में नहीं लग पाई हैं। नई 41011 एलईडी लाइटें स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम पर चलेंगी।
इसके लिए नगर निगम कार्यालय में आईटी बेस कॉमन कंट्रोल एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीसीएमएस) तैयार होगा। जहां किसी भी लाइट के खराब होने पर सीसीएमएस से पता चल जाएगा। यानी निगम कर्मचारियों को खराब लाइट का पता करने के लिए ना तो शिकायत का इंतजार करना पड़ेगा और ना ही उसे ढूंढने को भटकना पड़ेगा। इसके अलावा यह लाइटें कार्यालय से ही बंद व चलाई जा सकेंगी। यानी अलग से ऑपरेटर की जरूरत नहीं होगी।
सदन में दिखाई मोमबत्ती फिर भी वार्ड में अंधेरा
वार्ड तीन से निवर्तमान पार्षद हरमीन कोहली ने कहा कि वार्ड में मांग मुताबिक नई लाइटें नहीं लगीं। अभी भी वार्ड का काफी हिस्से में अंधेरा रहता है। यह हालात तब हैं, जब सदन में कई बार यह मुद्दा उठा चुके हैं और एक बार सदन में मोमबत्ती दिखा चुके हैं। इसके बाद भी वार्ड में स्ट्रटी लाइट व्यवस्था नहीं सुधार पाई है।
लाइटे न लगने में निगम अफसर जिम्मेदार
वार्ड 13 से निवर्तमान पार्षद निर्मल चौहान ने कहा कि निगम के ज्यादातर कार्य समय पर नहीं होते। इसके लिए अफसर जिम्मेदार हैं। एक साल पहले यूएलबी से लाइटें मंजूर थी। अभी तक यह लाइटें वार्डों में लग जानी चाहिए थी, पर ऐसा नहीं हुआ। ज्यादातर लाइटें सत्तापक्ष के पार्षदों के वार्डों में लगी और विपक्षी पार्षदों के वार्डों में लगाने से गुरेज किया गया।
स्ट्रीट लाइट जहां नहीं है या खराब है। वहां व्यवस्था में सुधार के लिए संबंधित अफसरों को दिशा निर्देश देंगे। मामले में जो भी नियमानुसार कार्रवाई बनेगी वह अमल में लाई जाएगी। - आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।