यमुनानगर। किसान गेहूं की फसल काटने के बाद खेतों में बचे फानों में आग लगा रहे हैं। आग से निकले धुएं के कारण सड़कों से गुजरने वाले वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। किसानों की ये लापरवाही वाहन चालकों के लिए कभी भी हादसे का सबब बन सकती है। आग लगने के करीब 12 से अधिक मामले कृषि एवं कल्याण विभाग के संज्ञान में आ चुके हैं। इसके बाद भी आग के मामलों पर रोक नही ल्रग पाई है। वहीं इस मामले में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक आत्मा राम गोदारा का कहना है कि खेतों में किसी भी फसल के अवशेष जलाने पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया हुआ है। यह सही है कि अवशेष जलाने से भूमि व पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। जो फाने जला रहे हैं उनकी पहचान की जा रही है।
जानकारी के अनुसार जिले में करीब 90 हजार हेक्टेयर में इस बार गेहूं की फसल का उत्पादन किया गया था। गेहूं बिजाई के बाद से लगातार मौसम खराब रहा। बारिश और ओलावृष्टि भी हुई। खराब मौसम के चलते नुकसान न हो जाए इसलिए किसानों ने खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को कंबाइन मशीन से कटवाया। मशीन गेहूं की फसल को ऊपर से तो काट लेती है, लेकिन फाने बच जाते हैं। किसान कुछ खेतों में खड़े फानों से तो स्ट्रा रीपर की मदद से पशुओं के लिए भूसा निकाल लेते हैं। वहीं कई किसान खेतों में बचे फानों को आग लगा देते हैं। इससे भूमि की उपजाऊ शक्ति तो खत्म होती ही है, साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। इसके साथ ही फानों में आग लगाने से निकले धुएं से सड़क पर हादसा होने का खतरा रहता है। जगाधरी-छछरौली हाईवे हो या फिर जगाधरी-बिलासपुर स्टेट हाईवे, सरस्वतीनगर, रादौर समेत कई ब्लॉक में फानों में आग लगाई जा रही है।
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वन संपदा को भी हो रहा नुकसान:
खेतों में लगाई गई आग धीरे-धीरे फैलते हुए सड़कों किनारे खड़े पेड़ों व नीचे पड़े पत्तों तक पहुंच जाती है। सड़कों के दोनों किनारे हजारों की संख्या में पेड़ खड़े हुए हैं। इन पेड़ों के सूखे पत्ते नीचे झड़ जाते हैं। इनमें आग लगने से सड़क किनारे खड़े पेड़ भी झुलस जाते हैं। अब तक सैकड़ों की संख्या में पेड़ इस आग की वजह से जल चुके हैं। इस वक्त गर्मी का सीजन चल रहा है। कुछ पेड़ तो गर्मी की वजह से झुलस रहे हैं तो जो बचे हैं वो आग की भेंट चढ़ रहे हैं। इससे वन विभाग को तो नुकसान पहुंच ही रहा है साथ में पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ रहा है।