संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से किशोरियों को बचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान अफवाहों और भ्रांतियों के कारण धीमा पड़ता नजर आ रहा है। प्रदेश में 14 वर्ष पूर्ण कर चुकी और 15 वर्ष से कम आयु की किशोरियों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया था। अब तक केवल 21 प्रतिशत ही टीकाकरण हो पाया है।
देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री ने 28 फरवरी को की थी। शुरुआती दिनों में अभियान की गति ठीक रही, लेकिन इसके बाद सोशल मीडिया और लोगों के बीच फैल रही गलत जानकारियों ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी। कई जगहों पर यह अफवाह फैलाई जा रही है कि एचपीवी वैक्सीन लगवाने से भविष्य में लड़कियां मां नहीं बन पाएंगी।
स्वास्थ्य विभाग ने इन अफवाहों को फर्जी बता रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में कुल दो लाख 26 हजार किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया था। चार अगस्त तक केवल 47 हजार 224 किशोरियों को ही टीका लगाया जा सका है। आंकड़ों के अनुसार टीकाकरण में करनाल जिला सबसे आगे है। यहां लक्ष्य के मुकाबले 57 प्रतिशत किशोरियों को टीका लगाया जा चुका है।
कैथल 56 प्रतिशत और कुरुक्षेत्र 53 प्रतिशत के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। यमुनानगर जिला 48 प्रतिशत टीकाकरण के साथ चौथे स्थान पर है। वहीं जींद जिले में सबसे कम केवल 5 प्रतिशत किशोरियों का टीकाकरण हुआ है। यमुनानगर जिले में 9,398 किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से अब तक 4,542 किशोरियों को टीका लगाया जा चुका है।
पूरी तरह से ठीक हैं टीका लगवाने वालीं किशोरियां
वहीं टीका लगवाने वाली किशोरियों का तर्क है कि इससे उन पर कोई असर नहीं पड़ा। वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। शहर निवासी वंशिका ने बताया कि जब यह अभियान शुरू हुआ था तो उसने सबसे पहले टीका लगवाया था। वह आठवीं कक्षा की छात्रा है। टीका लगवाने के बाद उसे कुछ नहीं हुआ। महक ने बताया कि शुरुआत में थोड़ी घबराहट थी, लेकिन डॉक्टरों ने पूरी जानकारी दी, जिससे विश्वास बढ़ा। डॉक्टरों ने उसे बताया कि यह टीका सामान्य टीकाकरण की तरह ही है। बड़े होकर महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर हो जाता है। यदि यह टीका लगा हो तो कैंसर होने का खतरा नहीं रहेगा। टीका लगवाने के बाद उसे किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई।
एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। यह टीका बाजार में काफी महंगा है। सरकार की ओर से इसे नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है । इस टीके का शरीर पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ता है।
- डॉ. पुनीत कालड़ा, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग।