प्रदेश में गन्ने की बम्पर पैदावार गन्ना उत्पादक किसानों के लिए घाटे का सौदा बन गई है। हरियाणा के किसान अपना गन्ना उत्तर प्रदेश की शुगर मिलों में ले जाकर सस्ते में बेंचने को मजबूर हो रहे हैं। प्रतिदिन कैथल व कुरुक्षेत्र जिलों के सैकड़ों किसान यमुनानगर के रास्ते उत्तर प्रदेश में गन्ना लेकर जा रहे हैं।
यमुनानगर जिले से प्रतिदिन कैथल व कुरुक्षेत्र की गन्ने से लदी सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रालियों यमुनानगर से होकर गुजर रही है। इन ट्रालियों को देखकर हर कोई समझता है कि ये गन्ना यमुनानगर की सरस्वती शुगर मिल में जा रहा है। लेकिन ये ट्रालियां शुगर मिल के आगे से होती हुई यमुनानगर की सीमा पार कर सहारनपुर में दाखिल होती हैं। कैथल व कुरुक्षेत्र के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के किसान भी उत्तर प्रदेश में अपना गन्ना ले जाकर सस्ते में बेच रहे हैं। ये ट्रालियां वाया लाडला, रादौर व यमुनानगर होते हुए सहारनपुर पहुंच रही हैं। गौरतलब है कि हरियाणा में गन्ने की कीमत देश में सबसे अधिक है। इस बार प्रदेश में गन्ने की बम्पर फसल होने के बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा मिलों में गन्ने की खरीद के उचित प्रबंध नहीं किए गए हैं। किसानों को मिलों से पर्चियां नहीं मिल पा रही है।
-चार दिन से उत्तर प्रदेश में गन्ना बिकने का इंतजार कर रहे किसान-
वाया यमुनानगर उत्तर प्रदेश की प्राइवेट मिलों में गन्ना लेकर पहुंचे कैथल के फतेहपुर गांव के किसान सूबे सिंह, सुरेश, भीम, वजिंद्र व राजीव ने बताया कि वे पिछले चार दिनों से मिल में गन्ना बेचने के लिए पड़े हैं। उनके पास जो पैसे थे, वे खत्म हो गए हैं। हालत यह है कि उनके पास खाने को पैसे नहीं है। इन किसानों ने बताया कि इस बार गन्ने का काफी अच्छी पैदावार हुई है। इस कारण कैथल मिल में गन्ने की पर्चियां नहीं मिल पा रही है। मजबूरन उन्हें सहारनपुर में आकर 280 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना बेचना पड़ रहा है, जबकि हरियाणा में गन्ने का दाम 320 रुपये प्रति क्विंटल है। उत्तर प्रदेश में गन्ना बेचने में किसानों को आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है। इसके अलावा उनकी चार-पंाच दिन की दिहाड़ी भी खराब हो रही है। उत्तर प्रदेश की प्राइवेट मिलों में हरियाणा का काफी गन्ना आने से अब मिल गन्ने के दाम कम करती जा रही है। ऐसे में सैकड़ों किलोमीटर ट्राली चलाकर उत्तर प्रदेश पहुंच रहे किसानों के सामने सस्ता गन्ना बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
-यूपी में गन्ना जाने से प्रदेश सरकार को भी लग रही टैक्स की चपत-
हरियाणा का गन्ना उत्तर प्रदेश जाने से प्रदेश सरकार को भी नुकसान हो रहा है। गौरतलब है कि शुगर मिलों से सरकार को परचेज टैक्स मिलता है जो कि प्रति क्विंटल डेढ़ रुपये है। इसके अलावा शुगर मिल में बनने वाले शीरा पर भी सरकार को करोड़ों रुपये का टैक्स मिलता है।
सरकार की अनदेखी का परिणाम :भाकियू
प्रदेश की शुगर मिलों की क्षमता कई सालों से नहीं बढ़ाई गई है। इस बार गन्ने की अच्छी फसल होने के कारण किसानों को मिलों से पर्चियां नहीं मिल पा रही हैं। इस वजह से हरियाणा का गन्ना उत्तर प्रदेश पहुंच रहा है। सरकार की अनदेखी के कारण प्रदेश के किसान अपना गन्ना उत्तर प्रदेश में बेंचने को मजबूर हो रहा है। यह समस्या सबसे ज्यादा कैथल, करनाल, पानीपत, गोहाना आदि सरकारी शुगर मिलों में आ रही है। इन शुगर मिलों से जुड़े किसान अपना गन्ना अपने ही शुगर मिलों में नहीं डाल पा रहे हैं।
संजू गुंदियाना, प्रदेश संयोजक, भारतीय किसान यूनियन