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दलालों के माध्यम से बेची जा रही गर्भपात की दवा

Sat, 18 Jun 2016 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
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यमुनानगर। पड़ोसी जिले सहारनपुर से गर्भपात की दवा खरीदकर इसे दलालों के माध्यम से जिले में बेचा जा रहा है। शुक्रवार रात को स्वास्थ्य विभाग द्वारा कैंप क्षेत्र में एक महिला दलाल को रंगे हाथों पकड़ने के बाद इसका खुलासा हुआ है। महिला दलाल की मार्फत स्वास्थ्य विभाग की  टीम ने कैंप क्षेत्र के हरिओम मेडिकल स्टोर संचालक के कर्मचारी को भी गर्भपात की दवा बेचते रंगे हाथों पकड़ा। पीएनडीटी इंचार्ज की शिकायत पर पुलिस ने महिला दलाल, मेडिकल स्टोर कर्मचारी व उसके संचालक को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एमटीपी एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
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स्वास्थ्य विभाग टीम द्वारा मेडिकल स्टोर संचालक हरिंद्र से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि वह सहारनपुर से गर्भपात की दवा लेकर आता है। हरिंद्र के अनुसार यह दवा बेचने वाले व्यक्ति को वह फोन पर आर्डर देता था। इसके बाद वह व्यक्ति सहारनपुर के घंटाघर चौक पर दवा लेकर आता था। यह दवा उसे 90 रुपये मेें मिलती है, जिसे 400 से 500 रुपये मेें बेचा जाता है। वह इस दवा को दलाल के माध्यम से बेचता था और दलाल को प्रति दवा के सौ रुपये कमीशन देता था। सहारनपुर से मात्र 90 रुपये में लाई गई गर्भपात की दवा दलाल के माध्यम से 500 रुपये में बेचे जाने का मामला सामने आने के बाद जिले में इस धंधे के बड़े पैमाने पर फलने-फूलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। गर्भ में हो रहे बेटियों के कत्ल को रोकने में जुटे स्वास्थ्य विभाग के लिए भी नई चुनौती सामने आई है।

गर्भपात की दवा बेचने के लिए हैं कड़े नियम कानून
मेडिकल स्टोर पर गर्भपात की दवा बेचने के लिए एमटीपी एक्ट के तहत नियम कानून बनाए गए हैं। इसके तहत किसी भी मेडिकल स्टोर पर यह दवा सिर्फ महिला रोग विशेषज्ञ की पर्ची पर ही दी जा सकती है। मेडिकल स्टोर पर इसका पूरा रिकार्ड होना चाहिए कि उसने कहां से और कितनी गर्भपात की दवा खरीदी है। साथ ही दवा खरीदने वाले का नाम भी दर्ज करना जरूरी है। इन नियमों की पालना के बाद मेडिकल स्टोर पर सिर्फ दवा बेची जा सकती है, स्टोर कर्मचारी दवा को खाने के तरीके के बारे में ग्राहक को नहीं बता सकता। इतने कड़े नियम के कारण मेडिकल स्टोर पर इसे बेचना आसान नहीं है। इसे दलालों के माध्यम से बेचे जाने की एक वजह कड़े नियम कानून भी है।
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क्या है मामला
स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिली थी कि कैंप क्षेत्र में रहने वाली सीमा नाम की महिला गर्भपात की दवा बेचती है। उसे रंगे हाथों पकड़ने के लिए सिविल सर्जन के निर्देश पर पीएनडीटी इंचार्ज डॉ. विजय दहिया के नेतृत्व में टीम गठित की गई। इसमें डॉ दहिया के अलावा ड्रग कंट्रोलर रितु मेहला व सीडीपीओ प्रवीन छाबड़ा शामिल थी। स्वास्थ्य विभाग की एक डिकोय ने सीमा से गर्भपात की दवा लेने के लिए फोन पर संपर्क किया। सीमा ने गर्भपात दवा की कीमत 500 रुपये बताई और उसे कैंप में अपने घर पर बुलाया। डॉ दहिया ने डिकोय को साइन किया हुआ 500 रुपये का नोट दे दिया डिकोय जब सीमा के घर पर पहुंची तो उसने 500 रुपये का नोट लेकर उसे गर्भपात की दवा दे दी, साथ ही उसे दवा खाने के तरीके भी बताए। इसी बीच इशारा पाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां पहुंच गई और सीमा से साइन किया हुआ 500 का नोट बरामद कर लिया गया। टीम द्वारा की गई पूछताछ में सीमा ने बताया कि व गर्भपात की दवा कैंप के एक मेडिकल स्टोर से लेकर आती है । टीम ने उसे भरोसा दिलाया कि यदि वह मेडिकल स्टोर से गर्भपात की दवा पकड़वा देगी तो उसे छोड़ दिया जाएगा। इसके बाद सीमा डिकोय को साथ लेकर कैंप के वीना नगर स्थित हरिओम मेडिकल स्टोर लेकर गई। स्टोर में मौजूद सलमान नाम के कर्मचारी ने डिकोय से 500 का नोट लेकर उसे गर्भपात की दवा दे दी। इतना ही नहीं उसने दवा किस प्रकार खानी है, इसके बारे में भी डिकोय को समझाया। इसी बीच स्वास्थ्य विभाग की टीम पुलिस के साथ मौके पर आ गई और स्टोर कर्मचारी को हिरासत में ले लिया। कुछ देर बाद ही मेडिकल स्टोर का संचालक हरिंद्र भी मौके पर आ गया।
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