आत्महत्या के लिए मजबूर करने के दोषी निजी बैंक कर्मी गांव शाहपुर थाना सदर जगाधरी निवासी परविंद्र सिंह को जिला एवं सत्र न्यायाधीश डा. सरिता गुप्ता की अदालत ने चार साल कठोर कारावास कैद तथा 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। जुर्माना राशि में से 45 हजार रुपये पीड़ित पक्ष को दिए जाएंगे। कोर्ट में छह महीने चली सुवाई के दौरान दर्जन भर लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
साढौरा निवासी मनजीत सिंह का शव तीन जुलाई 2015 को नदी किनारे सरकारी ट्यूबवेल के पास एक पेड़ पर लटका मिला था। साढौरा पुलिस ने मृतक के पिता महेंद्र सिंह की शिकायत पर गांव शाहपुर थाना सदर जगाधरी निवासी परविंद्र के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज किया था।
महेंद्र ने पुलिस को शिकायत दी थी कि वह कालाअंब स्थित एक प्राइवेट फैक्टरी में नौकरी कर रहा है। उसके तीन लड़के हैं। दूसरा लड़का मनजीत सिंह घर पर ही परचून की दुकान चलाता था। मनजीत की परविंद्र सिंह से एक साल से जान पहचान थी, जो कि साढौरा स्थित एचडीएफसी बैंक शाखा में कार्यरत है। शिकायतकर्ता के मुताबिक परविंदर द्वारा मनजीत पर लोन के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
2 जुलाई 2015 को सुबह करीब 11 बजे परविंदर उनके घर मनजीत के बारे में पूछने के लिए आया था। 11 बजे ही मनजीत घर से बाहर गया था। जब वह काफी देर तक वापस नहीं लौटा तो उन्होंने उसके मोबाइल पर फोन किया। लेकिन वह स्विच ऑफ मिला।
शाम तक नहीं लौटा तो उन्होंने आसपास के क्षेत्र में उसकी तलाश शुरू कर दी, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। तीन जुलाई को पड़ोसी सुशील कुमार ने बताया कि सरकारी ट्यूबवेल के पास मनजीत का शव पेड़ से लटका हुआ है। शिकायतकर्ता के मुताबिक मनजीत ने परविंदर से तंग आकर फांसी ली है।