यमुनानगर/रादौर। सिविल अस्पताल रादौर में उस समय मानवता शर्मसार हो गई, जब इलाज के लिए आई गर्भवती महिला को स्टाफ ने धक्के देकर बाहर निकाल दिया। इसके पश्चात महिला ने अस्पताल के मेन गेट पर पर बच्चे को जन्म दिया। प्रसव सही न होने के कारण कुछ ही देर में बच्चे ने दम तोड़ दिया। इस दौरान गर्भवती के साथ आए परिजन रोते बिलखते अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाते रहे। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। वहीं अस्पताल के पास से गुजरने वाले लोग भी यह मंजर देखते रहे, लेकिन कोई उसकी सहायता के लिए आगे नहीं आया। बच्चे की मौत पर जब हंगामा हुआ तो अस्पताल प्रशासन ने जच्चा को तुरंत भर्ती कर लिया। इस दौरान परिजनों ने अस्पताल स्टाफ को बच्चे की मौत का जिम्मेदार बताते हुए हंगामा किया। इसके बाद पुलिस पहुंची और परिजनों को समझा-बुझाकर शांत किया। पुलिस ने बच्चे का शव पोस्टमार्टम के लिए यमुनानगर सिविल अस्पताल पहुंचा दिया है। वहीं परिजनों के आरोपों पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
छोटाबांस की डेहा बस्ती निवासी सलजना करीब सात माह की गर्भवती थी। बुधवार को वह सास पंजाब कौर, मां सरदारी देवी के साथ अलट्रासाउंड करवाना था। इसलिए वह अस्पताल के बाहर स्थित आल्ट्रासाउंड सेंटर आई थी। इस दौरान अचानक सलजना को पेट में दर्द होने लगा, जिससे वह बेसुध होने लगी। उन्होंने बताया कि वे सलजना को लेकर अस्पताल में पहुंचे और उसे चिकित्सा देने की मांग की। लेकिन वहां मौजूद नर्स ने उससे बदतमीजी की और सलजना को इलाज नहीं दिया। जब उन्होंने सलजना को देखने के लिए दबाव बनाया तो स्टाफ नर्स ने उन्हें धक्के देकर बाहर निकाल दिया, लेकिन दर्द के मारे सलजना चिल्लाने लगी। वह उसे लेकर लौटने लगे तो सलजना को प्रसव पीड़ा हुई और उसने अस्पताल के मेन गेट पर खुले में बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान अस्पताल प्रशासन मूक बना देखता रहा। वहीं वहां से गुजरने वाले लोगों ने भी किसी तरह की कोई सहायता नहीं की। सुविधा न होने व खुले में डिलीवरी होने के कारण कुछ देर बाद बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद जच्चा के परिजन जमा हो गए और उन्होंने जमकर हंगामा किया। जिस पर रादौर थाना प्रभारी पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद परिजनों को शांत किया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए बच्चे का शव यमुनानगर सिविल अस्पताल पहुंचा दिया। वहीं परिजनों के आरोपों पर मामले की जांच शुरू कर दी है। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की मौत का जिम्मेदार अस्पताल प्रशासन है। यदि समय रहते सलजना को चिकित्सा मिल जाती तो बच्चा भी सुरक्षित होता और जच्चा की जान भी खतरे में न पड़ती।
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सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. विजय परमार ने बताया कि जिस समय गर्भवती महिला को अस्पताल लाया गया तो उस समय ऑपरेशन थियेटर में एक अन्य गर्भवती महिला का इलाज चल रहा था। जिस कारण अस्पताल का स्टाफ व्यस्त था। अस्पताल के किसी भी स्टाफ सदस्य ने गर्भवती महिला को धक्का नहीं दिया। आरोप बेबुनियाद हैं। गर्भवती महिला को समय से बहुत पहले डिलिवरी हो गई है। बच्चा पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ था। जिससे बच्चे की मौत हुई है।
हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस ने पहुंचकर जायजा लिया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की वजह से नवजात की मौत हुई है। पुलिस ने आरोपों के आधार पर शिशु का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
रमेशचंद कादियाना, प्रभारी, थाना रादौर।