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जमानत पर आए मोहित हत्याकांड के दोषी सुकरम पाल ने फंदे पर लटक दी जान

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यमुनानगर।
बिलासपुर के गांव संखेडा में हाईकोर्ट से जमानत पर आए मोहित हत्याकांड के दोषी सुकरमपाल ने घर के कमरे में फंदे पर लटककर जान दे दी। परिजनों का कहना है कि वह कई दिन से मानसिक रूप से परेशान चल रहा था। सुकरम पाल नवंबर 2013 में हुए मोहित हत्याकांड के मामले में जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा था। पिछले साल छह मार्च को हाईकोर्ट से जमानत पर आया था। सूचना मिलने पर बिलासपुर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करवाया। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। परिजनों के अनुसार इसी परेशानी के देर रात को अपने कमरे में फंदे से लटककर जान दे दी। सुबह जब परिवार के सदस्य उसे उठाने पहुंचे तो उसका शव फंदे से लटका हुआ था। सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच की।

अप्रैल 2017 में 14 लोगों को हुई थी उम्रकैद
नवंबर 2013 में तीर्थ नगर में हुए चर्चित मोहित हत्याकांड मामले में अदालत ने सात अप्रैल 2017 को सुकरम पाल सहित 14 दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। सभी दोषियों को 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। मामले में मोहित राणा पक्ष के पांच दोषियों को भी अदालत ने छह अप्रैल को पांच-पांच साल की सजा व 12-12 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस मामले में करीब 50 लोगों ने अपनी गवाही दी थी। सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने मामले में नामजद करीब दो दर्जन लोगों में से 14 लोगों को दोषी करार दिया था।
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ऐसे हुई थी मोहित की हत्या :
27 नवंबर 2013 को कुछ लोगों ने जगाधरी बस स्टैंड से मोहित व उसके साथी राहुल को अगवा कर लिया था। इसके बाद आरोपियों के कब्जे से किसी तरह राहुल तो बच निकला था, लेकिन इस दौरान आरोपियों ने मोहित की पहले तो निर्मम पिटाई की और बाद में उसे गाड़ी के पीछे बांधकर घसीटते हुए दर्दनाक हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद आरोपी उसे तीर्थनगर के नजदीक सड़क पर पड़े पानी में फेंक कर चले गए थे। हाथ व पांव बंधे मोहित का शव अगले दिन 28 नवंबर को बरामद किया गया था। मृतक मोहित के पिता राज सिंह की शिकायत पर 23 लोगों के खिलाफ अगवा कर हत्या करने का आरोप लगाया था।

शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों को सौंप दिया गया है। मृतक के पास से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। परिजनों ने मानसिक रूप से परेशान बताया है।
सुनील कुमार, एसएचओ, बिलासपुर
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