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ओवरलोड वाहन लील रहे जिंदगियां, विधायक बोले-ट्रांसपोर्टरों के साथ खनन ठेकेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई हो
-जठलाना, गुमथला, रादौर समेत दो दर्जन से ज्यादा गांवों में बढ़ी परेशानी, बच्चों को घर से बाहर जाने से रोक रहे हैं लोग
जठलाना । जब से यमुना में खनन खुला है, तब से ओवरलोड वाहनों से जिलावासी खौफ में हैं। राह चलते कब कौन सा ट्रक उनकी जिंदगी का चिराग बुझा दें, इसकी कोई गारंटी नहीं। यमुना के किनारे बसे दो दर्जन से ज्यादा गांवों के लोग सबसे ज्यादा भयभीत है। छोटी सड़कें होने की वजह से ओवरलोड वाहन आएं दिन किसी न किसी की जान ले रहे हैं। यहां सड़कों पर हर तीसरा वाहन ओवरलोड खनन सामग्री से भरा नजर आता है। तमाम शिकायतों के बावजूद न तो जिला प्रशासन और न ही आरटीए विभाग इन ओवरलोड वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए कोई कदम उठा रहे। जिससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालियां निशान उठने शुरू हो गए हैं।
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15 नाके लगाएं, लेकिन दबाव में हटा दिए गए
ओवरलोड पर रोक के लिए एक दिसंबर 2017 को जिले में 15 नाके लगाएं गए थे। जहां वाहनों के वजन की व्यवस्था करवाई गई थी। ताकि ओवरलोड पाएं जाने पर वाहनों का चालान बनाया जा सकें और उनमें से अतिरिक्त खनन सामग्री उतारी जा सकें। हालांकि भारी दबाव के चलते मई 2018 में इन्हें हटा दिया और ओवरलोड वाहन फिर से बेकाबू हो गए। यहां सीसीटीवी भी लगाएं गए थे, लेकिन ये कैमरे भी अब ठप पड़े हैं।
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ओवरलोड से लगातार हो रहे हैं हादसे
-जनवरी में गुमथला गांव के पास ट्यूशन पढ़कर लौट रहे 12वीं के छात्र उदित शर्मा को ओवरलोड ट्रक ने कुचल दिया था। एक घंटे तक ट्रक के नीचे दबा रहा और तड़प तड़प कर जान दे दी। इसके अलावा कई युवाओं की जान जा चुकी है।
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-ओवरलोड को लेकर क्षेत्र के लोग भयभीत है। आलम ये है कि लोगों ने अपने बच्चों को सड़कों की तरफ जाने से मना कर रखा है, लेकिन हर वक्त बच्चों की निगरानी नहीं की जा सकती। क्योंकि बच्चों को स्कूल व ट्यूशन भी जाना होता है और कई बार इमरजेंसी में कार्य भर करने होते हैं। ऐसे में ओवरलोड की वजह से हादसे में होनहार बच्चों की जान जा रही है। हमने हाई कोर्ट में ओवरलोड पर रोक के लिए संघर्ष किया, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत के चलते इस अंकुश नहीं लग पाया। अब हमने हाई कोर्ट में जनहित याचिका डाल कर न्याय की गुहार लगाई है। हमें उम्मीद है कि क्षेत्र के लोगों की जान बचाने के लिए हाई कोर्ट इस पर कड़ा संज्ञान लेगी।
-वरयाम सिंह, याचिकाकर्ता
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सीधी बातचीत-विधायक श्याम सिंह राणा
सवाल: क्या वजह है कि ओवरलोड नहीं रुक रहा।
जवाब: आरटीए विभाग द्वारा ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
सवाल: लोगों के आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण की वजह से कभी कभार कार्रवाई होती है।
जवाब: ऐसा बिल्कुल नहीं है, अगर किसी के पास जानकारी है तो मुझे दें, मैं एक्शन के लिए सीएम से बात करूंगा।
सवाल: तमाम सड़कें टूट रही हैं।
जवाब: सड़कों को सुधारने के लिए प्लानिंग की जा रही है। इस साल तमाम सड़कें ठीक कर दी जाएंगी।
सवाल: बेकसूर लोगों की जिंदगियां जा रही हैं।
जवाब: इस संबंध में जिला व क्षेत्र के अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए है।
सवाल: ओवरलोड से इलाके की जनता सरकार से नाराज है।
जवाब: ऐसा प्रयास किया जा रहा है कि अगर ठेकेदार फिर भी नियमों के विरुद्ध जाकर ओवरलोड वाहन भरेगा। उसका लाइसेंस रद्द करने की योजना बनाई जाएगी।
वर्जन
-ओवरलोड वाहनों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाता है। तीन साल के दौरान करीब पंद्रह करोड़ रुपए से ज्यादा का जुर्माना वसूला गया। साल 2018-19 के दौरान ही करीब पांच करोड़ का जुर्माना वसूला जा चुका है। ओवरलोड रोकने के लिए अलग से टीम गठित करके नए सिरे से प्लानिंग की है।-केके भादू, आरटीए
फोटो नंबर 18, 19