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इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी मंदबुद्धि महिला को लावारिस हालत में क्यों छोड़ा गया

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इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी मंदबुद्धि महिला को लावारिस हालत में क्यों छोड़ा गया
सिविल अस्पताल प्रशासन को फटकार लगाते हुए बोली महिला आयोग की सदस्य
सिविल अस्पताल में एक कोने में बेड पर रेप पीड़िता मंदबुद्धि महिला को देख सदस्य का पारा हुआ हाई
बोली, एक सप्ताह बीतने पर भी पुलिस नहीं निकाल पाई निष्कर्म, बहुत धीमी हो रही कार्रवाई
गौड़ ने मामले से जुड़े हर पहलु पर की अस्पताल प्रशासन व पुलिस से बातचीत
पीड़िता से बातचीत कर मौके पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड, कैदी वार्ड की प्रत्यक्षदर्शी महिलाओं के लिए बयान
आरोपी पुलिस कर्मी व एक प्रत्यक्षदर्शी महिला के बयान न होने पर दोबारा आएगी आयोग की टीम
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। सिविल अस्पताल में हुई मंदबुद्धि से दुष्कर्म के मामले में बुधवार को हरियाणा महिला आयोग (स्टेट कमीशन फॉर वुमन) की सदस्य नम्रता गौड़ यमुनानगर पहुंची। गौड़ ने पहले एसपी राजेश कालिया और केस से जुड़े अन्य पुलिस अधिकारियों से बातचीत की, इसके बाद सिविल अस्पताल का दौरा किया। दौरे के दौरान जब महिला आयोग की सदस्य गौड़ को दुष्कर्म पीड़िता मंदबुद्धि महिला अस्पताल के एक कोने में अकेली बेड पर पड़ी दिखाई दी तो उन्होंने इस पर अस्पताल प्रशासन को फटकार लगाई। गौड़ ने कहा कि इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी महिला को लावारिस हालत में क्यों छोड़ा गया। अस्पताल प्रशासन का फटकार सुनाने से पूर्व गौड़ ने मामले में पुलिस की कार्रवाई को भी धीमा बताया। कहा कि एक सप्ताह बीतने पर भी पुलिस अभी तक निष्कर्ष नहीं निकाल पाई। आयोग सदस्य गौड़ ने मामले से जुड़े हर पहलू की जांच की और मौके पर तैनात कर्मियों और चश्मदीद महिलाओं के बयान लिए। आरोपी पुलिस कर्मी और एक चश्मदीद महिला के बयान न होने पर आयोग की टीम दोबारा यमुनानगर आ सकती है।

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प्रोग्रेस न होने पर आई महिला आयोग की सदस्य :
सिविल अस्पताल का दौरा करने से पहले हरियाणा महिला आयोग की सदस्य नम्रता गौड़ एसपी राजेश कालिया व केस से जुड़े डीएसपी हेडक्वार्टर अनिल कुमार गुर्जर, महिला थाना एसएचओ कुलबीर कौर, एसआई कुसुम से मिली। इसके बाद उन्होंने प्रेस वार्ता की। यहां उन्होंने कहा कि मामले में अभी तक पुलिस की कार्रवाई धीमी रही है। एक सप्ताह में भी पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची। मामले में कोई प्रोग्रेस न होने पर उन्हें यहां आना पड़ा।
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पीड़ित महिला को लावारिस हालत में देख डॉक्टरों पर भड़की :
सचिवालय में प्रेसवार्ता करने के बाद महिला आयोग सदस्य गौड़ सीधी सिविल अस्पताल के महिला वार्ड में गई। महिला वार्ड के बेड पर लेटी हुई मंदबुद्धि महिला को अकेला लावारिस हालत में पड़ा देखा। वार्ड में केबिन में पीड़िता के बेड के अलावा अन्य बेड खाली पड़े हुए थे। उसके साथ वाले केबिन में भी कई बेड खाली पड़े हुए थे। इसके अलावा महिला के पास कोई अन्य व्यक्ति या पुलिस कर्मी तैनात नहीं था। वार्ड में महिला आयोग की टीम आने की सूचना पर तुरंत चिकित्सा अधीक्षक डा. विजय दहिया, डा. सुनील व अन्य डॉक्टर मौके पर पहुंचे। इसके बाद सीएमओ डा. कुलदीप भी मौके पर आए। गौड़ ने डॉक्टरों को फटकार सुनाते हुए कहा कि मंदबुद्धि महिला के साथ इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी उसे लावारिसों की हालत में क्यों छोड़ा गया। उसके वार्ड के एक कोने में बेड पर क्यों लेटाया गया है। जिसके बाद चिकित्सा अधीक्षक दहिया ने कहा कि यह वार्ड मंदबुद्धि मरीजों के लिए है। इसमें कोई ओर नहीं लेटाया जा सकता। वार्ड में पुलिस कर्मी की तैनाती है। इस महिला के लिए ट्रॉमा सेंटर में इंतजाम किया जाएगा।

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खाना लेकर गया था पुलिस कर्मी :
गौड़ ने मामले में कैदी वार्ड में मरीज राजेश शर्मा की पत्नी रेनू शर्मा के ब्यान लिए। रेनू ने बताया कि कैदी वार्ड का दरवाजा बंद रहता है। बाहर क्या हुआ वे नहीं देख सकते। मंदबुद्धि महिला से हुई घटना की रात करीब 12 बजे आरोपी पुलिस कर्मी खाना लेकर गया था। लेकिन कुछ देर बाद वापस आ गया था। इसके बाद गौड़ दूसरी प्रत्यक्षदर्शी फरीदा से मिलने गधौली में गई। लेकिन उसने खुद को ब्यान देने की हालत में नहीं होने की बात कहीं। गौड़ ने बताया कि महिला डरी हुई है। जिससे लग रहा है कि वह परिजनों के दबाव में बयान देना नहीं चाहती।

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रात को ही पुलिस को सूचना दी तो अगले दिन केस क्यों दर्ज :
गौड़ ने वार्ड में तैनात सिक्योरिटी गार्ड अंकुर, अंजना व एक अन्य महिला सिक्योरिटी गार्ड के भी बयान लिए। अंकुर ने बताया कि उसकी शाम सात बजे से सुबह सात बजे तक ड्यूटी होती है। जबकि महिला कर्मियों की ड्यूटी लेबर वार्ड के पास थी। 26 दिसंबर की रात करीब 12 बजे उसने महिला वार्ड में राउंड किया। सभी मरीज सोए हुए थे। इसके बाद वह खाना खाने के लिए चला गया। जब आया तो कुछ महिलाओं ने घटना के बारे में बताया। उसने तुरंत सूचना सिविल चौकी में दी। पुलिस मौके पर आई। गौड़ ने कहा कि रात को ही पुलिस आ गई थी, लेकिन कार्रवाई अगले दिन शाम पांच बजे हुई। इस पर महिला थाना एसएचओ ने कहा कि उनके पास 27 दिसंबर की शाम को ही एसपी के पास से सूचना आई थी। जिसमें सिविल सर्जन द्वारा ई-मेल के जरिए सूचना दी गई। उसी समय मामले में केस दर्जकर लिया गया था।

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ऑन थे कैमरे, डीवीआर थी बंद :
गौड़ ने चिकित्सा अधीक्षक से पूछा कि वारदात के समय सीसीटीवी कैमरे बंद क्यों थे। तब उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरे तो ऑन थे, लेकिन डीवीआर बंद था। सिविल अस्पताल में बिजली ठीक करने के लिए इसे बंद किया हुआ था।
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शौचालयों में मिली गंदगी :
दौरे के दौरान आयोग सदस्य गौड़ ने महिला वार्ड के शौचालयों की भी जांच की। जिसमें गंदगी मिली। गंदगी देख कर भी गौड़ ने सिविल प्रशासन को फटकार लगाई। जिसके बाद चिकित्सा अधीक्षक ने शौचालयों की सफाई करवाने के कर्मियों को निर्देश दिए।
फोटो : 21 से 24
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