खतरे से खाली नहीं बिलासपुर हाईवे का 15 किलोमीटर सफर
मार्ग के दोनों ओर खाई, ट्रैफिक कंट्रोल के नहीं प्रबंध, कई जगह साथ में सटे हैं बिजली के ट्रांसफार्मर और तार
फोग सीजन में होती हैं दर्जनों दुर्घटनाएं, बीते सप्ताह हादसे में गंवाई चार ने जान और चार हुए घायल
धुंध में हादसों की आशंका पर प्रशासन बना है अंजान, नहीं खिंची सफेद पट्टी, न लगे संकेतक न ट्रैफिक लाइट्स
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। मार्ग से सटे बिजली के ट्रांसफार्मर और झूलते तार और दोनों ओर बनी खाई के बीच बिलासपुर हाईवे का करीब 15 किलोमीटर सफर खतरे से खाली नहीं है। हर वर्ष फोग सीजन में दर्जनों सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ होने के बावजूद मार्ग पर ट्रैफिक कंट्रोल के प्रंबध अधूरे हैं। मार्ग पर न तो सफेद पट्टी, न ही संकेतक और न ही ट्रैफिक लाइट्स लगी हैं। ऐसे में धुंध बढ़ने पर मार्ग से निकलना जानलेवा हो सकता है, बावजूद इसके प्रशासन इस ओर कुछ करता नहीं दिख दे रहा है। जबकि बीते सप्ताह मार्ग पर हुए हादसे में चार लोगों को जान गंवानी पड़ी थी वहीं, इसमें चार लोग गंभीर घायल हुए थे।
एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) अंबाला मार्ग से लगते रक्षक विहार चौक से बिलासपुर हाईवे (स्टेट हाईवे नंबर-1) निकलता है। करीब 2010 में हाईवे के नव-निर्माण से दोनों ओर पांच से सात फुट गहरी खाई बन गई। जबकि साथ में रखे बिजली के ट्रांसफार्मर और गुजरते तार मार्ग के बिलकुल साथ सट गए। करीब 15 किलोमीटर हाईवे के सफर में साथ लगते अधिकांश लिंक रोड कच्चे और ढलान वाले हैं और कई तीव्र मोड़ भी हैं। ट्रैफिक कंट्रोल के उचित प्रबंध न होने से मार्ग पर 24 घंटे आवाजाही के बीच हादसे की आशंका बनी रहती है। हर वर्ष दिसंबर से फरवरी तक धुंध के बीच मार्ग पर दर्जनों सड़क दुर्घटनाएं हो जाती हैं। बावजूद इसके संबंधित विभाग हादसों पर अंकुश लगाने को लेकर संजीदा नहीं हैं।
आलम ये है कि सुबह के समय हल्की धुंध रहने लगी है, किंतु बिलासपुर हाईवे पर दोनों ओर सफेद पट्टी (पैज लाइन) नहीं खिंची जा सकी है। जबकि धुंध में मार्ग के दोनों ओर खाई होने के चलते पैज लाइन होनी जरूरी है, ताकि कम विजिबिलिटी में वाहन चालक को सड़क के किनारे (खत्म होने) का पता चल पाता है। पैज लाइन के अभाव में वाहन चालक को मार्ग की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती और वाहन के सड़क से नीचे उतरने पर चालक उस पर नियंत्रण खो देता है और हादसे का शिकार हो जाता है। कई बार चालक खुद व वाहन में सवार और साथ चलते वाहन में सवार चालक व सवारियां भी दुर्र्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
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ट्रैफिक कंट्रोल के प्रबंध अधूरे:
बिलासपुर हाईवे के करीब 15 किलोमीटर रास्ते के बीच कई चौराहे व ब्लाइंड (तीव्र) मोड़ हैं। बावजूद इसके मार्ग पर पैज लाइन समेत पूर्व सूचना बोर्ड, कैटआई, ब्लींकर, जेब्रा क्रॉसिंग व ट्रैफिक लाइट्स जैसे ट्रैफिक कंट्रोल के प्रबंध नहीं है। सड़क सुरक्षा संगठन के जिला महासचिव अवतार सिंह चुघ ने कहा कि फोग सीजन में हाईवे पर सफेद पट्टी (सेंटर व फेज लाइन) का होना जरूरी है। इसके अलावा चौराहों व तीव्र मोड़ों पर रेट्रो रिफ्लेक्टिव पूर्व सूचना बोर्ड, संकेतक, कैटआई व ब्लींकर जैसे ट्रैफिक कंट्रोल डिवाइस होने चाहिए। ताकि धुंध में चालक को वाहन चलाने में कोई परेशानी न हो और वह खुद की व दूसरों की जान जोखिम में न डाले।
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महज तीन-चार फुट की दूरी पर बिजली के ट्रांसफार्मर: रक्षक विहार चौक से बिलासपुर हाईवे के दो किलोमीटर के भीतर ही मार्ग से महज करीब तीन फुट दूरी पर बिजली के ट्रांसफार्मर रखे हैं। इसके अलावा मार्ग के साथ कई जगह बिजली के झूलते तार भी सटे हैं। ट्रांसफार्म और बिजली के तारों की ऊंचाई मार्ग के लगभग बराबर है। ऐसा करीब पांच वर्ष पहले नवनिर्माण कार्य से हाईवे की ऊंचाई बढ़ने से हुआ, चूंकि बिजली के पोल खाई में ही खड़े हैं। इस कारण मार्ग से आने-जाने वाले वाहन बिजली के ट्रांसफार्मर व तारों के पास से होकर गुजरते हैं। चूंकि हाईवे पर रात के समय रोशनी का भी अभाव है, ऐसे में बिजली के ट्रांसफार्मर व तार हादसे की वजह बन सकते हैं।
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बीते सोमवार हुई थी एक परिवार के चार लोगों की मौत, अन्य चार हुए थे जख्मी: बिलासपुर-जगाधरी मार्ग पर हरनौली बस स्टैंड के समीप बीते सोमवार देर रात डंपर की टक्कर से अनियंत्रित होकर पलटी कार में सवार एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई। जबकि कार में सवार चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। ये सभी लोग बिलासपुर से शादी समारोह से वापस घर लौट रहे थे। हादसे में बदनपुरी निवासी दीपक की पत्नी रिंकी (32), बेटे रियांक (3), बेटी शिवानी (6) व रिश्तेदार निर्मला (52) की मौत हुई। जबकि गुरदेव सिंह, कैंप निवासी लेखराज व चौगामा निवासी सुमित घायल हुए।
वर्जन
हाइवे के जिन मार्गों पर सफेद पट्टी फीकी पड़ गई है या नहीं है, वहां सफेद पट्टी खिंचवाई जाएगी। इसके साथ ही जहां कहीं बर्म का काम होना है, उसे पूरा कराया जाएगा।
जसविंद्र सिंह, एक्सईएन, नेशनल हाईवे अथोरिटी ऑफ इंडिया।
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