कथा के शुभारंभ पर कलश यात्रा निकालती महिलाएं। संवाद
- फोटो : जिला न्यायालय में लगी राष्ट्रीय लोग अदालत में मौजूद वादकारी।
संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। गोशाला में पितृपक्ष के अवसर पर 13 से 17 सितंबर तक पांच दिवसीय गोकथा का शुभारंभ किया गया। इस दौरान महिलाओं ने कलश यात्रा भी निकाली।
कथा वाचक पंडित सुभाष चंद ने कहा कि गोसेवा मात्र धर्म नहीं, अपितु एक राष्ट्रीय कर्तव्य है। उन्होंने यह भी बताया कि गाया माता की सेवा करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और पितृ दोषों का शमन होता है। पंडित सुभाष चंद ने बताया कि भारतीय संस्कृति में गाय का सबसे सुंदर जुड़ाव भगवान कृष्ण की कहानियों से जुड़ा है। किंवदंतियों के अनुसार, कृष्ण का गायों के प्रति प्रेम प्रकृति और जीवन के साथ उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। वे गायों को खेतों में चराने ले जाते थे और यह सुनिश्चित करते थे कि उन्हें पर्याप्त भोजन और सुरक्षा मिले।